
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चालू वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक उत्तर प्रदेश का कुल क्रेडिट डिपॉजिट (सीडी रेशियो) 62 प्रतिशत से अधिक करने का लक्ष्य तय किया है। रविवार को राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी (SLBC) की विशेष बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने सभी बैंक प्रतिनिधियों से उनके सीडी रेशियो की समीक्षा की और इसे बढ़ाने के लिए ठोस और प्रभावी प्रयास करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि दिसंबर 2025 तक प्रदेश का कुल सीडी रेशियो 60.39 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो पिछले लगभग दस वर्षों का सबसे ऊंचा स्तर है।
मुख्यमंत्री को बताया गया कि जनपद-वार समीक्षा में 40 प्रतिशत से कम सीडी रेशियो वाले जिलों की संख्या घटकर केवल 5 रह गई है। वहीं 40-50, 50-60 और 60-80 प्रतिशत श्रेणी वाले जिलों की संख्या में लगातार सुधार हुआ है। मार्च 2018 में 40 प्रतिशत से कम सीडी रेशियो वाले 20 जिले थे, जो अब घटकर 5 रह गए हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि मार्च 2026 तक सभी जनपदों के सीडी रेशियो में लक्षित सुधार सुनिश्चित किया जाए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ‘एक जिला-एक उत्पाद (ODOP)’ की सफलता के बाद अब राज्य सरकार ‘एक जिला-एक व्यंजन (ODOC)’ योजना शुरू कर रही है। इसका उद्देश्य छोटे व्यापारियों, पारंपरिक पाक कला से जुड़े कारीगरों और गिग वर्कर्स को नई पहचान देना है।
उन्होंने बैंकों से अपील की कि जैसे ओडीओपी को वित्तीय सहयोग मिला, उसी तरह ओडीओसी को भी प्राथमिकता देते हुए अधिक से अधिक ऋण उपलब्ध कराए जाएं। सरकार प्रशिक्षण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग में पूरा सहयोग दे रही है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान का उदाहरण देते हुए कहा कि इन योजनाओं की सफलता में बैंकों की भूमिका बेहद अहम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अनावश्यक दस्तावेज, बार-बार वेरिफिकेशन और प्रक्रिया में देरी से लाभार्थी हतोत्साहित होते हैं। बैंकिंग प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में आर्थिक गतिविधियां, औद्योगिक निवेश, उद्यमिता, कृषि और महिला-युवा स्वावलंबन तेजी से बढ़ रहा है। इस प्रगति में बैंकिंग तंत्र की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। उन्होंने निर्देश दिया कि किसानों, MSME, स्टार्टअप, महिला स्वयं सहायता समूहों और युवाओं को ऋण उपलब्धता सरल, सम्मानजनक और समयबद्ध हो। 40 प्रतिशत से कम सीडी रेशियो वाले जिलों में विशेष अभियान और गांवों को लक्षित कर मेगा ऋण मेलों के आयोजन के निर्देश दिए गए।
बैठक में बताया गया कि पिछले 8 वर्षों में उत्तर प्रदेश का बैंकिंग तंत्र काफी मजबूत हुआ है।
इसी अवधि में ऋण वितरण 4.05 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 12.34 लाख करोड़ रुपये हो गया। कुल बैंकिंग व्यवसाय 12.80 लाख करोड़ से बढ़कर 32.79 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है।
जुलाई-अक्टूबर 2025 के वित्तीय समावेशन अभियान में उत्तर प्रदेश ने देश में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। आठ प्रमुख संकेतकों में से सात में प्रदेश को पहला स्थान मिला। इस दौरान 57,699 वित्तीय साक्षरता शिविर, 22.24 लाख जनधन खाते, 43.35 लाख पीएमएसबीवाई नामांकन, 6.90 लाख अटल पेंशन योजना सब्सक्रिप्शन दर्ज हुए।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में ऊर्जा, कृषि, इंफ्रास्ट्रक्चर, उद्योग, MSME और NBFC सह-ऋण मॉडल सहित विभिन्न क्षेत्रों में 22,000 करोड़ रुपये से अधिक के बड़े ऋण स्वीकृत किए गए। विश्वकर्मा जयंती पर अकेले 1.32 लाख करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत हुए। फरवरी और मार्च 2026 में दो मेगा ऋण वितरण कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।
पिछले दस वर्षों में प्रदेश में 3.89 लाख से अधिक बैंकिंग आउटलेट स्थापित हुए हैं। दिसंबर 2025 तक कुल 4.30 लाख बैंकिंग आउटलेट सक्रिय हैं। जनधन योजना के तहत 10.21 करोड़ से अधिक खाते खोले जा चुके हैं, जो देश में सर्वाधिक हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्वास जताया कि बैंक और सरकार मिलकर उत्तर प्रदेश को ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाएंगे।
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