
लखनऊ। वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने सोमवार को विधानमंडल के बजट सत्र के पहले दिन उत्तर प्रदेश की पहली आर्थिक समीक्षा सदन में प्रस्तुत की। इस समीक्षा में प्रदेश की अर्थव्यवस्था, निवेश, प्रति व्यक्ति आय, राजकोषीय स्थिति और विभिन्न क्षेत्रों के योगदान का विस्तृत विवरण दिया गया है।
वित्त मंत्री के अनुसार, पिछले आठ वर्षों में उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2016–17 में ₹13.30 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था बढ़कर 2024–25 में ₹30.25 लाख करोड़ से अधिक हो चुकी है। वहीं 2025–26 में इसके ₹36 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। इससे उत्तर प्रदेश देश की सबसे बड़ी राज्य अर्थव्यवस्थाओं में मजबूती से स्थापित हो रहा है।
वित्त मंत्री ने कहा कि यह ऐतिहासिक क्षण है क्योंकि उत्तर प्रदेश भी अब भारत सरकार की तरह अपनी आर्थिक समीक्षा पहली बार सदन के सामने रख रहा है। उन्होंने बताया कि यह समीक्षा केवल आंकड़ों का संकलन नहीं है, बल्कि राज्य की प्रगति, जनता की उम्मीदों और भविष्य की संभावनाओं का जीवंत दस्तावेज है।
भारत की सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक गौरव का प्रतीक उत्तर प्रदेश अब नई आर्थिक सोच और ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है। 25 करोड़ से अधिक आबादी वाला यह प्रदेश कृषि उत्पादन, औद्योगिक विकास और तकनीकी नवाचार का बड़ा केंद्र बन रहा है।
वित्त मंत्री ने बताया कि पहले निवेशकों की प्राथमिकता में न रहने वाला उत्तर प्रदेश अब औद्योगिक निवेश का प्रमुख केंद्र बन गया है। पारदर्शी नीतियों, समयबद्ध स्वीकृतियों और ‘ट्रिपल एस’ (Safety, Stability, Speed) की नीति के कारण प्रदेश को अब तक ₹50 लाख करोड़ से अधिक निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। यह निवेश माहौल में आए बड़े सकारात्मक बदलाव को दर्शाता है।
आर्थिक समीक्षा के अनुसार, राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में उत्तर प्रदेश का योगदान लगातार बढ़ रहा है।
यह वृद्धि प्रदेश की आर्थिक मजबूती और देश के विकास में उसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।
समीक्षा में बताया गया कि स्वतंत्रता के बाद पहली बार उत्तर प्रदेश ने प्रति व्यक्ति आय में गिरावट के लंबे रुझान को पलटा है।
राष्ट्रीय औसत की तुलना में भी स्थिति सुधरी है। वर्ष 2014–15 में यह राष्ट्रीय औसत का केवल 50.2% था, जो 2024–25 में बढ़कर 53.5% हो गया।
आर्थिक समीक्षा के अनुसार, उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था अब बहु-क्षेत्रीय विकास की ओर बढ़ रही है। वर्ष 2024–25 में जीएसडीपी योगदान:
यह दर्शाता है कि प्रदेश अब केवल कृषि आधारित अर्थव्यवस्था नहीं रहा, बल्कि उद्योग और सेवा क्षेत्र भी तेजी से बढ़ रहे हैं।
वित्त मंत्री ने बताया कि प्रदेश के बजट आकार में पिछले नौ वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
यह वृद्धि लगभग ₹4.86 लाख करोड़ की है, जो पूर्ववर्ती सरकारों के मुकाबले काफी अधिक है। वर्ष 2008–09 से 2016–17 के बीच वृद्धि केवल ₹2.34 लाख करोड़ थी।
प्रदेश सरकार ने सार्वजनिक निवेश को प्राथमिकता देते हुए पूंजीगत व्यय में बड़ी वृद्धि की है।
इससे अवसंरचना विकास, उद्योग विस्तार और रोजगार सृजन को गति मिली है।
आर्थिक समीक्षा में उत्तर प्रदेश की वित्तीय स्थिति को संतुलित और अनुशासित बताया गया है।
यह राष्ट्रीय और वैश्विक औसत से कम है, जो बेहतर वित्तीय प्रबंधन का संकेत है।
प्रदेश का अपना कर राजस्व भी तेजी से बढ़ा है।
यह लगभग ढाई गुना वृद्धि है, जिसे कर सुधार और प्रशासनिक दक्षता का परिणाम बताया गया है।
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