गंगा बेसिन संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम, UP ने पड़ोसी राज्यों के साथ बनाया संयुक्त निगरानी तंत्र

Published : Jan 07, 2026, 08:18 PM IST
up interstate illegal sand mining prevention joint monitoring

सार

उत्तर प्रदेश सरकार ने अंतरराज्यीय अवैध रेत खनन और परिवहन पर रोक के लिए मध्य प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड के साथ संयुक्त निगरानी तंत्र विकसित करने का निर्णय लिया है। वैध ट्रांजिट पास, ISTP और डिजिटल प्लेटफॉर्म से सख्ती बढ़ेगी।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने अंतरराज्यीय अवैध रेत खनन, परिवहन और बिक्री पर प्रभावी रोक लगाने के लिए ठोस कदम उठाया है। इसके तहत यूपी भूतत्व और खनिकर्म विभाग ने सीमावर्ती राज्यों मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और बिहार से सक्रिय सहयोग की मांग की है। इन राज्यों के खनन विभाग और प्रशासन के साथ मिलकर संयुक्त निगरानी और प्रवर्तन व्यवस्था विकसित की जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप यह पहल गंगा बेसिन में अवैध रेत खनन रोकने और पर्यावरण संरक्षण को मजबूती देने की दिशा में अहम मानी जा रही है।

वैध ट्रांजिट पास और आईएसटीपी को किया जा रहा अनिवार्य

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में भूतत्व और खनिकर्म विभाग ने बताया कि अंतरराज्यीय अवैध रेत परिवहन रोकने के लिए पड़ोसी राज्यों के साथ संयुक्त निगरानी तंत्र पर काम किया जा रहा है। इस संबंध में मध्य प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड के संबंधित विभागों से पत्राचार किया गया है।

सबसे अधिक जोर अन्य राज्यों से उत्तर प्रदेश में आने वाले रेत लोडिंग वाहनों के लिए वैध ट्रांजिट पास के साथ अंतरराज्यीय परिवहन प्रपत्र (ISTP) को अनिवार्य करने पर दिया गया है। सीमावर्ती जिलों में ट्रांजिट पास जारी करते समय ही देय अंतरराज्यीय परिवहन शुल्क जमा कराने की व्यवस्था भी लागू करने की तैयारी है।

इंटीग्रेटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म से होगी सख्त निगरानी

अधिकारियों ने बताया कि अवैध परिवहन रोकने के लिए एक इंटीग्रेटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया जा रहा है। इससे न केवल रेत परिवहन की प्रभावी निगरानी संभव होगी, बल्कि पारदर्शिता बढ़ेगी और राजस्व संग्रह में भी वृद्धि होगी। यह डिजिटल प्रणाली वैध परिवहन और अवैध गतिविधियों के बीच स्पष्ट अंतर स्थापित करेगी।

रियल टाइम डेटा के आधार पर साझा होगी जानकारी

बैठक में यह भी बताया गया कि सीमावर्ती जिलों में स्थित सभी लोडिंग पॉइंट्स- जैसे खनन पट्टे, खनिज भंडारण स्थल और क्रशर पर वाहन लोडिंग नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। पड़ोसी राज्यों के चेकगेट और चेकपोस्ट की सूची साझा की जाएगी और यूपी की ओर जाने वाले वाहनों का विवरण नियमित रूप से उपलब्ध कराया जाएगा। यह जानकारी रियल टाइम डेटा के आधार पर सीमावर्ती जिलों के जिलाधिकारी और खनन निदेशालय के बीच साझा की जाएगी, जिससे संयुक्त निगरानी और छापेमारी आसान होगी।

पड़ोसी राज्यों के साथ संयुक्त प्रवर्तन कार्रवाई

अधिकारियों ने बताया कि सीमावर्ती जिलों के जिलाधिकारी, पुलिस, परिवहन और खनन विभाग के अधिकारियों के साथ मासिक समन्वय बैठकें आयोजित की जाएंगी। इन बैठकों में पड़ोसी राज्यों के अधिकारी और टास्क फोर्स सदस्य मिलकर संयुक्त प्रवर्तन कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे। यह व्यवस्था प्रदेश में अवैध रेत खनन की निगरानी को और मजबूत करेगी और अंतरराज्यीय अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण लगाएगी।

पर्यावरण संरक्षण और राजस्व वृद्धि को मिलेगा बढ़ावा

अधिकारियों ने बताया कि पहले से ड्रोन सर्वे और जीपीएस ट्रैकिंग जैसी तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है, लेकिन सीमावर्ती जिलों में अंतरराज्यीय समन्वय की कमी के कारण चुनौतियां बनी हुई थीं। पड़ोसी राज्यों के सहयोग से भूतत्व और खनिकर्म विभाग का यह प्रयास न केवल राजस्व में वृद्धि करेगा, बल्कि गंगा बेसिन में अवैध रेत खनन पर लगाम लगाने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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