बॉटलनेक से ब्रेकथ्रू तक: कैसे योगी सरकार ने यूपी को निवेशकों का फेवरेट बना दिया

Published : Jan 14, 2026, 04:49 PM IST
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सार

उत्तर प्रदेश ने बीते साढ़े आठ वर्षों में निवेश और विकास के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाई है। योगी सरकार के संरचनात्मक सुधार, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, डिजिटल गवर्नेंस और सरल नीतियों ने यूपी को बॉटलनेक से ब्रेकथ्रू राज्य बना दिया है।

उत्तर प्रदेश को लंबे समय तक “बॉटलनेक स्टेट” के रूप में देखा जाता रहा, जहां जटिल प्रक्रियाएं, देरी और प्रशासनिक उलझनें विकास की राह में रोड़ा बनती थीं। लेकिन अब तस्वीर अलग है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य ने खुद को एक ऐसे “ब्रेकथ्रू स्टेट” के रूप में स्थापित किया है, जहां निवेश, उद्योग और रोजगार के लिए माहौल लगातार मजबूत हुआ है। यह बदलाव किसी एक योजना का नहीं, बल्कि वर्षों तक चले गहरे संरचनात्मक सुधारों का नतीजा है।

कागजी सुधार नहीं, सिस्टम में बदलाव

योगी सरकार ने “मिनिमम गवर्नमेंट–मैक्सिमम गवर्नेंस” को केवल नारा नहीं, बल्कि प्रशासन की कार्यशैली बनाया। नीतियों के साथ-साथ प्रक्रियाओं और डिजिटल सिस्टम को इस तरह बदला गया कि उद्योग, निवेशक और आम नागरिक – तीनों को इसका सीधा लाभ मिला। विभागों के चक्कर कम हुए, मंजूरी की समय-सीमा तय हुई और पूरी व्यवस्था पहले से कहीं अधिक पारदर्शी बनी।

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ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में यूपी की छलांग

व्यवसाय के अनुकूल माहौल बनाने के प्रयासों का असर राष्ट्रीय स्तर पर भी दिखा। वर्ष 2017-18 में जहां उत्तर प्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में 12वें स्थान पर था, वहीं 2019 में वह दूसरे स्थान पर पहुंच गया। 2022 और 2024 में राज्य को ‘टॉप अचीवर’ का दर्जा मिला। लॉजिस्टिक्स और वाणिज्यिक गवर्नेंस जैसे क्षेत्रों में भी यूपी लगातार बेहतर प्रदर्शन करता रहा। यह संकेत है कि सुधार केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहे, बल्कि जमीन पर दिखाई दिए।

‘निवेश मित्र’ से बदली मंजूरी की रफ्तार

औद्योगिक मंजूरियों के लिए शुरू किया गया ‘निवेश मित्र’ पोर्टल राज्य के लिए गेमचेंजर साबित हुआ। एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर 45 विभागों की 525 से अधिक सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। लाखों आवेदन ऑनलाइन निस्तारित हुए और अधिकांश मामलों में समयबद्ध स्वीकृति सुनिश्चित की गई। अब ‘निवेश मित्र 3.0’ की तैयारी है, जिसमें रीयल-टाइम ट्रैकिंग, स्मार्ट डैशबोर्ड और राष्ट्रीय सिंगल विंडो सिस्टम से जुड़ी सुविधाएं होंगी, जिससे निवेश प्रक्रिया और तेज व सरल हो सके।

उद्योगों की सबसे बड़ी परेशानी मानी जाने वाली जटिल अनुपालन प्रणाली को भी बड़े पैमाने पर सरल किया गया। दर्जनों विभागों में हजारों अनुपालनों को खत्म या सरल किया गया। पुराने कानूनों और नियमों को निरस्त किया गया, कई प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया और लाइसेंस व पंजीकरण जैसी अनिवार्यताओं में ढील दी गई। इससे छोटे व्यापारियों और एमएसएमई सेक्टर को खास राहत मिली।

केंद्र से मिली मान्यता, निवेशकों का भरोसा बढ़ा

डी-रेगुलेशन के क्षेत्र में किए गए इन सुधारों को केंद्र सरकार ने भी सराहा। “डी-रेगुलेशन 1.0” कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश को देश में पहला स्थान मिला। यह मान्यता इस बात का संकेत है कि राज्य में नियमों की अनिश्चितता कम हुई है और प्रशासनिक भरोसे का माहौल बना है। निवेशकों के लिए यह स्पष्ट संदेश है कि यूपी अब स्थिर और पूर्वानुमेय नीतियों वाला राज्य है।

एक्सप्रेसवे नेटवर्क, डिफेंस कॉरिडोर, औद्योगिक पार्क, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, डेटा सेंटर और लॉजिस्टिक्स हब जैसे प्रोजेक्ट्स ने उत्तर प्रदेश को एक उभरते औद्योगिक केंद्र के रूप में पहचान दिलाई है। इन परियोजनाओं से न केवल निवेश बढ़ा, बल्कि रोजगार, निर्यात और स्थानीय उद्यमिता को भी नई दिशा मिली।

अब राज्य सुधारों के अगले चरण में प्रवेश कर चुका है, जहां जोर तेजी से क्रियान्वयन और ठोस परिणामों पर है। सरकार का फोकस निवेश परियोजनाओं की निगरानी, समयबद्ध कार्य और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन पर रहेगा। बीते वर्षों की उपलब्धियों ने यह साफ कर दिया है कि उत्तर प्रदेश अब अतीत की बाधाओं से आगे निकल चुका है और विकास व निवेश के एक नए दौर की ओर बढ़ रहा है।

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