
लखनऊ। प्रदेश में संभावित बाढ़ और अतिवृष्टि की स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को व्यापक तैयारी और मजबूत समन्वय पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि जितनी बेहतर और समयबद्ध तैयारी होगी, उतनी ही तेजी और प्रभावी तरीके से चुनौतियों का समाधान किया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री ने बाढ़ और अतिवृष्टि पूर्व प्रबंधन की समीक्षा करते हुए सभी तटबंधों, ड्रेनों और संवेदनशील स्थलों की समय पर मरम्मत, सुदृढ़ीकरण और नियमित निगरानी को अनिवार्य बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सतर्कता, विभागों के बीच बेहतर समन्वय और तय समयसीमा में कार्य पूरा करना ही सुरक्षित बाढ़ प्रबंधन की सबसे बड़ी कुंजी है।
बैठक में प्रमुख सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश में गंगा, सरयू (घाघरा), राप्ती, रामगंगा, गंडक, यमुना, गोमती और सोन नदी बेसिन से जुड़े कई जनपद बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में आते हैं। नदी पट्टी और वर्षा पैटर्न के विश्लेषण के आधार पर इस वर्ष 12 जनपदों में स्थित 18 तटबंधों को संवेदनशील चिह्नित किया गया है, जिनकी कुल लंबाई 241.58 किलोमीटर है। वहीं 11 जनपदों के 19 तटबंधों को अति संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है, जिनकी कुल लंबाई 464.92 किलोमीटर है। इन सभी स्थानों पर अग्रिम सुरक्षा कार्य प्राथमिकता के आधार पर कराए जा रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव से बचाव के लिए बड़े पैमाने पर ड्रेनों की सफाई और ड्रेजिंग का कार्य किया जा रहा है। विभाग के अधीन कुल 10,727 ड्रेन हैं, जिनकी कुल लंबाई 60,047 किलोमीटर है। अधिकारियों ने बताया कि कई प्रमुख रूटों पर सफाई कार्य पूरा हो चुका है, जबकि शेष कार्य तय समयसीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में यह भी बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए स्वीकृत ड्रेजिंग परियोजनाएं जनपदवार लागू की जा रही हैं। इससे नदी प्रवाह बेहतर होगा और तटीय इलाकों में जलभराव की समस्या कम होगी। इसके साथ ही वर्ष 2026 की संभावित बाढ़ स्थिति को ध्यान में रखते हुए नई सुरक्षा परियोजनाएं प्रस्तावित की गई हैं, जिनके परीक्षण और अनुमोदन की प्रक्रिया जारी है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी तटबंधों और बैराजों पर रियल-टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने ड्रोन मैपिंग, वाटर लेवल सेंसर और स्थानीय प्रशासन के साथ बेहतर समन्वय को और मजबूत करने पर बल दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां नदी की मुख्य धारा में सिल्ट की अधिकता हो और नदी उथली हो गई हो, वहां पहले ड्रेजिंग कर नदी को चैनलाइज किया जाए। यदि ड्रेजिंग से समाधान संभव न हो, तभी तटबंध या कटान निरोधी अन्य उपाय अपनाए जाएं।
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