
लखनऊ, उत्तर प्रदेश आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार राज्य स्वच्छ, हरित और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से उभर रहा है। उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति-2022 के अंतर्गत आगामी पांच वर्षों में 22,000 मेगावाट विद्युत उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे प्रदेश की ऊर्जा जरूरतों को पर्यावरण-संवेदनशील तरीके से पूरा किया जा सकेगा।
22 हजार मेगावाट सौर ऊर्जा का रोडमैप आर्थिक समीक्षा में बताया गया है कि प्रस्तावित 22,000 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन में 6,000 मेगावाट रूफटॉप सोलर संयंत्रों से, 14,000 मेगावाट यूटिलिटी स्केल एवं सोलर पार्कों से तथा 2,000 मेगावाट पीएम-कुसुम योजना के माध्यम से प्राप्त किए जाएंगे। नीति के तहत 13.50 लाख घरों को रूफटॉप सोलर प्लांट से आच्छादित कर राज्य अनुदान प्रदान किया जाएगा, जिससे आम उपभोक्ताओं को सस्ती और स्वच्छ बिजली मिलेगी।
16 नगर निगम होंगे सौर नगर प्रदेश सरकार ने अयोध्या को मॉडल सोलर सिटी के रूप में विकसित करने का लक्ष्य तय किया है। इसके साथ ही 16 नगर निगमों एवं नोएडा को सोलर सिटी बनाया जाएगा। बैटरी स्टोरेज को बढ़ावा देने, बुंदेलखंड और पूर्वांचल क्षेत्रों में ट्रांसमिशन सहायता, सार्वजनिक व निजी भूमि पर रियायती लीज तथा 30,000 युवाओं के कौशल विकास को भी इस नीति का हिस्सा बनाया गया है। नेट-मीटरिंग व्यवस्था के माध्यम से ग्रिड से जुड़ी रूफटॉप परियोजनाओं को केंद्र और राज्य सरकार के अनुदान से प्रोत्साहित किया जा रहा है।
वृद्धि आर्थिक समीक्षा के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 में प्रदेश में जहां मात्र 288 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित थीं, वहीं वर्तमान में यह क्षमता बढ़कर 2,815 मेगावाट तक पहुंच चुकी है। यह वृद्धि प्रदेश की ऊर्जा नीति और निवेश-अनुकूल वातावरण का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
उत्तर प्रदेश जैव ऊर्जा नीति-2022 के सकारात्मक परिणाम भी आर्थिक समीक्षा में सामने आए हैं। जैव अपशिष्टों के उपयोग, कम्प्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) प्लांट, बायो-कोल, बायो-डीजल और बायो-एथेनॉल की स्थापना को बढ़ावा देने के चलते प्रदेश 213 टन प्रतिदिन की सीबीजी उत्पादन क्षमता के साथ देश में प्रथम स्थान पर है।
कृषि में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए पीएम-कुसुम योजना के अंतर्गत बड़े स्तर पर कार्य किया गया है। योजना के घटक सी-1 के तहत वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 में 3,024 कृषि पम्पों का सोलराइजेशन कराया गया। वहीं घटक सी-2 के अंतर्गत पृथक कृषि विद्युत फीडरों के सोलराइजेशन हेतु प्रथम चरण में 22 सबस्टेशनों पर 34.8 मेगावाट क्षमता की सौर परियोजनाओं के लिए पीपीए हस्ताक्षरित किए गए हैं। द्वितीय चरण में 567 सबस्टेशनों पर 1,586.44 मेगावाट क्षमता की सौर परियोजनाओं के लिए लेटर ऑफ अवार्ड जारी किए जा चुके हैं।
आर्थिक समीक्षा में यह भी उल्लेख किया गया है कि केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा एनसीएपी (नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम) के अंतर्गत चयनित 130 शहरों में स्वीकृत गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन और वायु गुणवत्ता में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं।
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