ODOP के बाद ODOC: UP के पारंपरिक व्यंजनों को मिलेगी वैश्विक पहचान

Published : Jan 24, 2026, 06:51 PM IST
uttar pradesh ODOC

सार

ODOP की सफलता के बाद यूपी सरकार ने “एक जनपद–एक व्यंजन” (ODOC) योजना शुरू की है। इसका उद्देश्य पारंपरिक व्यंजनों को ब्रांडिंग, GI टैग, पर्यटन और ई-कॉमर्स के जरिए वैश्विक पहचान दिलाना है।

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में वर्ष 2018 में उत्तर प्रदेश में शुरू की गई एक जनपद-एक उत्पाद (ODOP) योजना ने प्रदेश के स्थानीय उद्योगों, कारीगरों और निर्यात को नई गति दी। इस योजना के सफल क्रियान्वयन से लाखों कारीगरों को स्वरोजगार मिला और यूपी के उत्पादों ने वैश्विक बाजार में पहचान बनाई।

'एक जनपद-एक व्यंजन' योजना की शुरुआत

अब इसी सफल मॉडल को आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश की समृद्ध पाक-कला विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए 'एक जनपद-एक व्यंजन' यानी ODOC (One District One Cuisine) योजना की शुरुआत की है। यह योजना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'विरासत संग विकास' विजन का विस्तार है, जिसमें संस्कृति, पर्यटन, रोजगार और निर्यात को एक साथ जोड़ा गया है।

ओडीओसी योजना का मुख्य उद्देश्य

ODOC योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के हर जनपद से एक विशिष्ट, पारंपरिक और ऐतिहासिक व्यंजन की पहचान की जाएगी। इस योजना के प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार हैं-

  • प्रदेश की पारंपरिक पाक-कला विरासत का संरक्षण और संवर्धन
  • स्थानीय कारीगरों, हलवाइयों और फूड वेंडर्स का पंजीकरण
  • चयनित व्यंजनों का गुणवत्ता मानकीकरण, ब्रांडिंग और मार्केटिंग
  • राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यंजनों को पहचान दिलाना
  • स्थानीय आजीविका, स्वरोजगार और MSME सेक्टर को बढ़ावा देना

रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा

ODOP की तरह ODOC योजना भी जमीनी स्तर पर रोजगार सृजन का प्रभावी माध्यम बनेगी। इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ मिलेगा। बेहतर पैकेजिंग, GI टैगिंग और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से स्थानीय व्यंजनों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाया जाएगा।

पैकेजिंग, प्रशिक्षण और गुणवत्ता पर फोकस

इस योजना के तहत इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पैकेजिंग के सहयोग से फूड पैकेजिंग, शेल्फ लाइफ बढ़ाने और सुरक्षित परिवहन पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। स्थानीय उद्यमियों को FSSAI सर्टिफिकेशन के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। पारंपरिक फूड वेंडर्स को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा, जिससे उनकी पहुंच और आय दोनों बढ़ेंगी।

जीआई टैग और पर्यटन से जुड़ेगा स्वाद

चयनित व्यंजनों की GI टैगिंग कर उनकी प्रामाणिकता और अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही पर्यटन विभाग के सहयोग से प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों, धार्मिक स्थलों और महोत्सवों में ODOC फूड स्टॉल लगाए जाएंगे, ताकि पर्यटक एक ही स्थान पर उत्तर प्रदेश के विविध स्वादों का अनुभव कर सकें।

दुनिया तक पहुंचेगा उत्तर प्रदेश का स्वाद

उत्तर प्रदेश का लगभग हर जनपद किसी न किसी खास व्यंजन के लिए प्रसिद्ध है। जैसे- आगरा का पंछी पेठा, मथुरा का ब्रजवासी पेड़ा, अयोध्या का रामआसरे पेड़ा, अलीगढ़ (इगलास) का चमचम, बाराबंकी की चंद्रकला, पूर्वांचल का बाटी-चोखा और लिट्टी-चोखा, लखनऊ की रेवड़ी और मलाई मक्खन, काशी की लौंगलता और मलइयो, संडीला (हरदोई) के लड्डू और कानपुर के समोसे।

ऐसे सैकड़ों व्यंजन हैं जो अपने क्षेत्र में लोकप्रिय हैं, लेकिन राज्य या देश से बाहर सीमित पहचान रखते हैं। ODOC योजना के माध्यम से उत्तर प्रदेश के सभी 75 जनपदों के इन ऐतिहासिक और स्वादिष्ट व्यंजनों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा।

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