UP Health News: योगी सरकार के प्रयास से UP में संचारी रोगों पर काबू, डेंगू-मलेरिया मौतों में बड़ी कमी दर्ज

Published : Feb 15, 2026, 08:04 PM IST
UP communicable disease control

सार

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के प्रयासों से डेंगू, मलेरिया और एईएस/जेई जैसे संचारी रोगों पर नियंत्रण मजबूत हुआ है। डिजिटल सर्विलांस, लैब विस्तार और जागरूकता अभियानों से जांच बढ़ी और मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले नौ वर्षों में संचारी रोगों के नियंत्रण के लिए कई व्यापक और ठोस कदम उठाए हैं। डेंगू, मलेरिया और एईएस/जेई जैसे गंभीर रोगों पर प्रभावी कार्रवाई करते हुए जांच, इलाज और मॉनिटरिंग व्यवस्था को मजबूत बनाया गया है। डिजिटल सर्विलांस, लैब नेटवर्क के विस्तार और त्वरित उपचार से मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।

डिजिटल सर्विलांस पोर्टल से मजबूत हुई रोग निगरानी व्यवस्था

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार प्रदेश में एकीकृत डिजिटल सर्विलांस पोर्टल (IDSP) विकसित किया गया है, जिससे रोगों की निगरानी अधिक प्रभावी हुई है। इस पोर्टल पर 34,334 प्रयोगशालाएं पंजीकृत हैं, जिनमें 31,885 सरकारी और 2,439 निजी लैब शामिल हैं। इन प्रयोगशालाओं में 16 संक्रामक रोगों और 6 वैक्सीन से बचाव योग्य बीमारियों की नियमित जांच हो रही है। डिजिटल प्लेटफॉर्म से समय पर सूचना मिलने के कारण रोगों की पहचान और नियंत्रण की प्रक्रिया तेज हुई है।

डेंगू जांच सुविधाओं का विस्तार, मृत्यु दर में बड़ी कमी

डेंगू की जांच सुविधाओं में पिछले वर्षों में काफी बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2017 में केवल 29 जिलों में 36 लैब थीं, जबकि 2025 तक सभी जिलों में 89 प्रयोगशालाएं सक्रिय हो गईं। इनमें 86 सेंटिनल और 3 एपेक्स लैब शामिल हैं। बेहतर जांच और उपचार के कारण डेंगू की मृत्यु दर 2017 में 0.91 से घटकर 2025 में 0.06 हो गई, यानी लगभग 94% की कमी दर्ज की गई।

मलेरिया नियंत्रण में सुधार: जांच बढ़ी, मरीज घटे

मलेरिया नियंत्रण में भी प्रदेश ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। वर्ष 2017 में 32,342 मरीज दर्ज किए गए थे, जो 2025 में घटकर 14,688 रह गए। यह लगभग 55% की कमी दर्शाता है। वहीं जांचों की संख्या 46.69 लाख से बढ़कर 1.54 करोड़ हो गई, यानी लगभग 229% की वृद्धि हुई।

एईएस और जेई नियंत्रण में ऐतिहासिक उपलब्धि

एईएस/जेई नियंत्रण कार्यक्रम के तहत भी उल्लेखनीय सफलता मिली है। वर्ष 2017 से 2025 तक एईएस रोगियों की संख्या में 85% की कमी आई। इससे होने वाली मौतों में 99% और मृत्यु दर में 94% गिरावट दर्ज की गई। इसी अवधि में जेई के मामलों में 96% और इससे होने वाली मौतों में 98% की कमी आई। यह उपलब्धि खासतौर पर पूर्वांचल क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

ब्लॉक स्तर पर इंसेफलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर से इलाज बेहतर

सरकार ने दिमागी बुखार के उन्मूलन को प्राथमिकता देते हुए प्रभावित जिलों में चिकित्सा सुविधाएं बढ़ाईं। गोरखपुर और बस्ती मंडल की आईसीयू इकाइयों में वेंटिलेटर सुविधा उपलब्ध कराई गई। पीआईसीयू, ब्लॉक स्तरीय इंसेफलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर, सेंटिनल और एपेक्स लैब की स्थापना से गंभीर मरीजों को समय पर बेहतर इलाज मिल रहा है।

जागरूकता अभियान, स्वच्छता और सामुदायिक भागीदारी पर जोर

सरकार ने चिकित्सा सुविधाओं के साथ-साथ जागरूकता अभियानों, स्वच्छता कार्यक्रमों और सामुदायिक सहभागिता पर भी ध्यान दिया। गांव-गांव सर्वे, लार्वा रोधी छिड़काव, फॉगिंग और आशा व आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से घर-घर संपर्क अभियान चलाए गए। डिजिटल मॉनिटरिंग से प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर समय पर नियंत्रण उपाय किए गए, जिससे संचारी रोगों पर प्रभावी नियंत्रण संभव हुआ।

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