Bengal:11 साल की बच्ची के रेप-मर्डर का आरोपी पुलिस एनकाउंटर में ढेर, छीना था हथियार

Published : Jul 08, 2026, 10:29 AM IST
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सार

बारुईपुर रेप-मर्डर केस में बड़ा मोड़! नाबालिग बच्ची के मुख्य आरोपी प्रभाष मंडल की पुलिस एनकाउंटर में मौत, रीकंस्ट्रक्शन से पहले हथियार छीनकर भागने की कोशिश का दावा।

West Bengal Baruipur Rape Murder Case: पश्चिम बंगाल के बारुईपुर में मंगलवार की आधी रात के सन्नाटे को अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट ने चीर दिया। समय था करीब रात के 12:45 बजे। बारुईपुर पुलिस स्टेशन की एक विशेष टीम 12 साल की मासूम बच्ची के रेप और मर्डर के मुख्य आरोपी प्रभाष मंडल को लेकर सूर्यपुर की तरफ बढ़ रही थी। पुलिस का मकसद था उस खौफनाक वारदात के घटनाक्रम को फिर से समझना (क्राइम रीकंस्ट्रक्शन)। लेकिन जैसे ही टीम उस जगह पहुंची जहाँ पीड़िता का शव मिला था, हवा में तैरता सस्पेंस एक खूनी मुठभेड़ में बदल गया। रीकंस्ट्रक्शन शुरू होने से ठीक पहले, आरोपी मंडल ने अचानक एक पुलिसकर्मी पर झपट्टा मारा और उसका सर्विस हथियार छीन लिया। उसने पुलिस टीम पर एक राउंड फायर किया और अंधेरे का फायदा उठाकर भागने की कोशिश की। लेकिन पुलिस ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की; गोलियों की आवाज थमी तो मंडल जमीन पर खून से लथपथ पड़ा था। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

 

 

बोरी में बंद वो 'लाश'... जिसने पूरे बंगाल को ला खड़ा किया बारूद के ढेर पर!

इस खूनी मुठभेड़ की पटकथा कुछ दिनों पहले 4 जुलाई को ही लिख दी गई थी, जब एक मासूम लड़की अचानक लापता हो गई। इसके बाद जो सच सामने आया, उसने पूरे इलाके की रूह कंपा दी। लड़की का शव बारुईपुर के एक सुनसान तालाब में एक बोरी के भीतर बेरहमी से ठसा हुआ मिला। इस वीभत्सता ने स्थानीय लोगों के सब्र का बांध तोड़ दिया। गुस्साए लोगों ने बारुईपुर-जयनगर रोड को पूरी तरह जाम कर दिया, रास्तों पर टायर जलाए और पुलिस के वाहनों में जमकर तोड़फोड़ की। जनता की बस एक ही मांग थी—दोषियों को तुरंत फांसी दी जाए। जनआक्रोश को थामने के लिए पुलिस ने फौरन एक्शन लेते हुए प्रभाष मंडल सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया और छह सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया।

 

 

 

 

शक की बिनाह पर 'मॉब लिंचिंग': भीड़ के वीभत्स न्याय ने ले ली एक निर्दोष की जान!

जब समाज में कानून व्यवस्था पर से भरोसा डगमगाता है, तो भीड़ खुद जज और जल्लाद बनने की कोशिश करती है। बारुईपुर में भी ऐसा ही एक खौफनाक मोड़ आया। बच्ची का शव मिलने के कुछ ही घंटों बाद, एक बेकाबू और गुस्साई भीड़ ने शक के आधार पर इंद्रजीत मंडल नाम के एक स्थानीय व्यक्ति को घेर लिया। पुलिस की तफ्तीश से पहले ही भीड़ ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए उसकी पीट-पीटकर हत्या (लिंचिंग) कर दी। बाद में जो खुलासा हुआ, उसने सबको सुन्न कर दिया। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने खुद पुष्टि की कि पुलिस की प्रारंभिक जांच के आधार पर इंद्रजीत मंडल पूरी तरह निर्दोष थे। उनका इस घिनौने अपराध से कोई लेना-देना नहीं था। भीड़ के इस 'गलत न्याय' ने एक बेकसूर परिवार को ताउम्र का दर्द दे दिया।

 

 

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का '72 घंटे' का अल्टीमेटम: क्या प्रशासनिक लापरवाही छिपी थी?

इस दोहरे हत्याकांड और एनकाउंटर के बाद राज्य की राजनीति और प्रशासन में हड़कंप मच गया है। लोगों के भारी गुस्से और तनाव को देखते हुए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मोर्चा संभाला। उन्होंने साउथ 24 परगना के पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय में पीड़ित परिवार से मुलाकात की। इसके तुरंत बाद पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने पुलिस महानिदेशक (DGP) सिद्धार्थ नाथ गुप्ता को इस पूरे घटनाक्रम पर महज 72 घंटे के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का सख्त निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कड़े लहजे में कहा, "अगर शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस की कार्रवाई में एक प्रतिशत की भी लापरवाही पाई गई, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ ऐसा एक्शन होगा जिसे वे भूल नहीं पाएंगे।"

 

 

'राष्ट्र-विरोधी ताकतों' का सीक्रेट कॉल रिकॉर्ड: क्या इस दंगे के पीछे कोई बड़ी साजिश थी?

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस पूरे मामले में एक और बेहद सनसनीखेज दावा किया है, जिसने इस घटना में एक नया सियासी सस्पेंस पैदा कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस भीषण हिंसा, सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने और रेलवे ट्रैक को बाधित करने के पीछे सामान्य नागरिकों का गुस्सा नहीं, बल्कि विपक्षी दलों और "कट्टरपंथी व राष्ट्र-विरोधी ताकतों" से जुड़े लोगों का हाथ था। उन्होंने खुलासा किया कि जांचकर्ताओं ने हिंसा भड़काने वाले मास्टरमाइंड्स के खिलाफ कॉल रिकॉर्डिंग सहित कई पुख्ता डिजिटल सबूत जुटा लिए हैं। उपद्रव मचाने वाले लगभग 200 लोगों की पहचान कर ली गई है, जिन्हें जल्द ही सलाखों के पीछे भेजा जाएगा और निर्दोष इंद्रजीत की लिंचिंग करने वालों पर सीधे हत्या का मुकदमा चलेगा। दोनों प्रभावित परिवारों को इंसाफ, मुआवजा और सूर्यपुर में नई पुलिस चौकी का वादा करते हुए मुख्यमंत्री ने घायलों का हाल भी जाना।

 

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