बंगाल चुनाव में EC का बड़ा फैसला: क्यों करानी पड़ रही 21 मई को पूरी फलता सीट पर दोबारा वोटिंग?

Published : May 03, 2026, 07:27 AM IST

फलता पश्चिम बंगाल रिपोल 2026: EVM छेड़छाड़ आरोप, हिंसा और सियासी टकराव के बीच चुनाव आयोग का बड़ा फैसला-285 बूथों पर दोबारा वोटिंग। BJP vs TMC घमासान, लोकतंत्र पर सवाल, क्या बदलेगा नतीजा?

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West Bengal Falta Repoll 2026: पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय बड़ा मोड़ आ गया, जब भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने दक्षिण 24 परगना जिले के फलता विधानसभा क्षेत्र में सभी पोलिंग स्टेशनों पर दोबारा मतदान कराने का ऐलान कर दिया। आयोग ने इस असाधारण कदम के पीछे “चुनाव से जुड़े गंभीर अपराध” और “लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने” जैसी गंभीर वजहों का हवाला दिया है। यह फैसला राज्य की चुनावी विश्वसनीयता और पारदर्शिता को लेकर गहरे सवाल खड़े करता है।

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285 बूथों पर दोबारा वोटिंग: कितना बड़ा है मामला?

चुनाव आयोग के आदेश के मुताबिक, फलता विधानसभा क्षेत्र के सभी 285 पोलिंग स्टेशनों—जिनमें सहायक बूथ भी शामिल हैं-पर 21 मई को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक मतदान कराया जाएगा। यह अपने आप में बेहद दुर्लभ है, क्योंकि आमतौर पर दोबारा मतदान सीमित बूथों तक ही सीमित रहता है। इतने बड़े पैमाने पर री-पोल यह संकेत देता है कि चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ियाँ व्यापक स्तर पर हुईं।

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EVM विवाद ने बढ़ाई सियासी गर्मी

इस पूरे घटनाक्रम की जड़ में EVM से छेड़छाड़ के आरोप हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आरोप लगाया कि कई बूथों पर उनके चुनाव चिह्न वाले बटन पर टेप लगाया गया था, जिससे मतदाता प्रभावित हुए। दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे विपक्ष की “हार की बौखलाहट” बताया। दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप ने माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया।

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ज़मीनी टकराव और गिरफ्तारी से बढ़ा तनाव

मतदान के दौरान और उसके बाद फलता क्षेत्र में हिंसक झड़पों की खबरें सामने आईं। समर्थकों के बीच टकराव, मतदाताओं को डराने-धमकाने और हमलों के आरोपों ने स्थिति को गंभीर बना दिया। चुनाव आयोग की शिकायत के बाद पुलिस ने तृणमूल कांग्रेस के तीन कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार भी किया। इससे यह स्पष्ट होता है कि मामला सिर्फ तकनीकी गड़बड़ी का नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था की चुनौती का भी है।

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अभिषेक बनर्जी का खुला चैलेंज

इस फैसले के बाद तृणमूल के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए BJP को खुली चुनौती दी। “डायमंड हार्बर मॉडल” का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि कोई भी ताकत इस क्षेत्र में उनकी पकड़ को कमजोर नहीं कर सकती। उनका बयान इस पूरे राजनीतिक संघर्ष को और अधिक तीखा बना रहा है।

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पहले भी हुए थे री-पोल, लेकिन अब मामला बड़ा

इससे पहले भी चुनाव आयोग ने डायमंड हार्बर और मगराहाट पश्चिम के 15 बूथों पर दोबारा मतदान कराया था, जहां 90% से अधिक मतदान दर्ज हुआ। लेकिन फलता में सभी बूथों पर री-पोल का निर्णय यह दर्शाता है कि आयोग इस बार किसी भी तरह की चूक या विवाद को लेकर बेहद सख्त रुख अपना रहा है।

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21 मई-फैसले का दिन या नई शुरुआत?

फलता में दोबारा मतदान सिर्फ एक चुनावी प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र की विश्वसनीयता की परीक्षा बन गया है। अब सभी की नजरें 21 मई पर टिकी हैं, जब सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक दोबारा मतदान होगा। क्या यह लोकतंत्र की मजबूती का संकेत है, या फिर चुनावी प्रक्रिया पर गहराते अविश्वास का? फलता की यह कहानी सिर्फ एक सीट की नहीं, बल्कि पूरे चुनावी सिस्टम की विश्वसनीयता की परीक्षा बन चुकी है।

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