
Hydrogen Train in India: देश में आज, 17 जुलाई को एक नई शुरुआत हुई है। हरियाणा के जींद से पहली हाइड्रोजन ट्रेन चली। यह एक ऐसी ट्रेन है, जिसमें न डीजल लगता है, न ऊपर से बिजली की तार चाहिए। ये ट्रेन खुद अपनी बिजली बनाती है। अब सवाल ये है कि क्या आने वाले दिनों में ये ट्रेन आपके शहर तक भी पहुंचेगी? आइए जानते हैं रेलवे का प्लान क्या है और अगले फेज में कहां-कहां यह ट्रेन जा सकती है...
यह ट्रेन 10 डिब्बों की है और इसमें करीब 2600 यात्री एक साथ सफर कर सकते हैं, जिसकी वजह से इसे दुनिया की सबसे बड़ी हाइड्रोजन ट्रेन कहा जा रहा है। इस ट्रेन में हाइड्रोजन भरने के लिए जींद में देश का सबसे बड़ा रिफ्यूलिंग प्लांट भी बनाया गया है। अभी ये ट्रेन जींद और सोनीपत के बीच चल रही है। इसकी मैक्सिमम स्पीड 75 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है।
एक बार के सफर का किराया सिर्फ 5 से 25 रुपए के बीच रखे जाने की उम्मीद है। जिससे पैसेंजर्स को काफी राहत मिलने वाली है। यानी इस ट्रेन में सफर करना काफी सस्ता होगा और अगर यह देश के बाकी हिस्सों में चलती है, तो आपके आने-जाने का खर्च काफी कम हो सकता है।
नहीं। रेलवे का प्लान इससे कहीं बड़ा है। असल में जींद-सोनीपत रूट तो सिर्फ पहला टेस्ट है। अगर ये पायलट प्रोजेक्ट कामयाब रहा, तो आगे चलकर दार्जिलिंग, कालका-शिमला और देश के दूसरे पहाड़ी और गैर-बिजली वाले रूट्स पर भी हाइड्रोजन ट्रेनें उतारी जाएंगी। दरअसल रेलवे ने ये पूरा प्लान कई साल पहले ही तैयार कर लिया था। साल 2020-21 में 'हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज' नाम की एक स्कीम शुरू की गई थी, जिसके तहत देश के हेरिटेज और पहाड़ी रूट्स पर 35 हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने का टारगेट रखा गया।
रेलवे की नजर जिन हेरिटेज रूट्स पर है, उनमें दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे, नीलगिरी माउंटेन रेलवे, कालका-शिमला रेलवे, माथेरान हिल रेलवे, कांगड़ा घाटी, बिलमोरा-वाघई और मारवाड़-देवगढ़ मदरिया जैसे रूट शामिल हैं। ये सभी रूट फिलहाल नैरो गेज पर डीजल इंजन से ही चलते हैं। यानी इन जगहों पर बिजली की तार बिछाना मुश्किल और महंगा है, इसलिए हाइड्रोजन ट्रेन यहां के लिए बिल्कुल फिट बैठती है।
भारतीय रेलवे का लक्ष्य साल 2030 तक पूरी तरह नेट-जीरो कार्बन एमिटर बनने का है। पहाड़ी इलाकों में बिजली की तार बिछाना बेहद खर्चीला काम है, ऐसे में हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी से डीजल पर निर्भरता कम होगी और भारी-भरकम इलेक्ट्रिफिकेशन खर्च भी बचेगा। इस उपलब्धि के साथ भारत उन गिनती के देशों में शामिल हो गया है जहां हाइड्रोजन ट्रेन चलती है। भारत अब जर्मनी, जापान और चीन जैसे देशों की उस लिस्ट में आ गया है जहां हाइड्रोजन ट्रेनें पहले से चल रही हैं।
अभी सिर्फ जींद-सोनीपत रूट पर ट्रायल शुरू हुआ है। रेलवे पहले इसी रूट से मिलने वाले डेटा और अनुभव को परखेगा, उसके बाद ही आगे के रूट्स पर काम शुरू होगा। यानी दार्जिलिंग, कालका-शिमला जैसे रूट्स पर हाइड्रोजन ट्रेन आने में अभी वक्त लग सकता है, लेकिन साफ है कि आने वाले सालों में ये टेक्नोलॉजी देश के कई हिस्सों तक पहुंच सकती है।
डिस्क्लेमर: आगे के रूट्स पर विस्तार की योजना जींद-सोनीपत पायलट प्रोजेक्ट की सफलता पर निर्भर करेगी। तारीखें और रूट अभी प्रस्तावित हैं, अंतिम फैसला रेलवे की आधिकारिक घोषणा पर निर्भर करेगा।
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