
ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच एक ऐसा मोड़ आया जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया। युद्ध के 33वें दिन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अपना रुख बदल लिया। उन्होंने कहा कि इस समुद्री रास्ते से अमेरिका का सीधा लेना-देना नहीं है और जिन देशों को तेल चाहिए, वे खुद इसकी जिम्मेदारी उठाएं।
यह बयान इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि अमेरिका पहले ही मध्य पूर्व में बड़ी संख्या में सैनिक तैनात कर चुका है और होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर कई दौर की बैठकें भी हो चुकी थीं। ऐसे में सवाल उठने लगा कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि ट्रंप ने अचानक अपना फैसला बदल दिया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 16 मार्च को व्हाइट हाउस में एक अहम बैठक हुई। इस बैठक में ट्रंप के साथ रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और सेना के वरिष्ठ सलाहकार जनरल डेन केन मौजूद थे। बैठक के दौरान ट्रंप ने सवाल किया कि आखिर अमेरिका होर्मुज में सेना क्यों नहीं भेज रहा है और ईरान इस रास्ते को कैसे रोक पा रहा है। इसके जवाब में जनरल डेन केन ने ट्रंप को विस्तार से पूरी स्थिति समझाई।
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जनरल केन ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य का भूगोल ऐसा है कि वहां युद्ध करना बेहद मुश्किल हो सकता है। यह रास्ता बहुत संकरा है और यहां बड़े युद्धपोतों को सुरक्षित तरीके से चलाना आसान नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि इस इलाके में एक छोटा ड्रोन या छोटी नाव भी बड़े युद्धपोतों को नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसे में अगर अमेरिका यहां सीधे सैनिक भेजता है तो उसे भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
सैन्य सलाह के दौरान यह भी कहा गया कि अगर अमेरिका होर्मुज में सैनिक उतारता है तो यह संघर्ष लंबे समय तक चल सकता है। इससे अमेरिका को लगातार आर्थिक और सैन्य नुकसान झेलना पड़ सकता है। इसके अलावा यह भी तय नहीं है कि इस रास्ते पर नियंत्रण पाने के बाद ईरान की सरकार झुक जाएगी। यानी युद्ध का परिणाम भी स्पष्ट नहीं है।
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित एक महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। दुनिया के कई तेल टैंकर इसी रास्ते से गुजरते हैं। आंकड़ों के मुताबिक सामान्य दिनों में इस रास्ते से हर दिन लगभग 20 से 21 मिलियन बैरल तेल का परिवहन होता है। यह दुनिया की कुल तेल खपत का करीब 20 प्रतिशत माना जाता है। इसके अलावा तरलीकृत प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा भी इसी रास्ते से गुजरता है।
57 वर्षीय जनरल डेन केन अमेरिका के वरिष्ठ सैन्य सलाहकारों में शामिल हैं। वे राष्ट्रपति को सैन्य रणनीति से जुड़े मामलों में सलाह देते हैं और सेना के शीर्ष नेतृत्व में उनकी अहम भूमिका मानी जाती है। बताया जाता है कि केन शुरुआत से ही ईरान के साथ बड़े स्तर की जंग के पक्ष में नहीं थे। माना जा रहा है कि उनकी रणनीतिक सलाह के बाद ही ट्रंप ने होर्मुज को लेकर अपना रुख बदल लिया।
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