
Who is Saayoni Ghosh: बंगाल की राजनीति में सयानी घोष एक ऐसा नाम हैं, जिन्होंने बहुत कम समय में खुद को एक अभिनेत्री से राष्ट्रीय स्तर की नेता के रूप में स्थापित किया। अभिनय की दुनिया से राजनीति तक का उनका सफर काफी दिलचस्प रहा है। कभी ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की सबसे भरोसेमंद नेताओं में गिनी जाने वाली सयानी घोष अब पार्टी से बगावत को लेकर चर्चा में हैं।
सयानी घोष ने अपने करियर की शुरुआत बेहद कम उम्र में की थी। साल 2010 में उन्होंने मात्र 17 वर्ष की उम्र में बंगाली फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने टीवी और फिल्मों में लगातार काम किया और धीरे-धीरे बंगाल के सांस्कृतिक जगत का एक चर्चित चेहरा बन गईं। उनकी लोकप्रियता केवल मनोरंजन जगत तक सीमित नहीं रही, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े लोगों के बीच भी उनकी अच्छी पहचान बनी।
साल 2011 में सयानी घोष ने बंगाली फिल्म 'शत्रु' में एक छोटी लेकिन अहम भूमिका निभाई। यह फिल्म उनके करियर के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हुई। इस फिल्म के बाद उन्हें बंगाली सिनेमा में पहचान मिलने लगी। फिल्मों के अलावा उन्होंने थिएटर में भी सक्रिय रूप से काम किया। थिएटर के जरिए उन्होंने सामाजिक मुद्दों और सांस्कृतिक आंदोलनों से जुड़े लोगों के बीच भी अपनी अलग पहचान बनाई।
करीब एक दशक तक एक्टिंग की दुनिया में एक्टिव रहने के बाद सयानी घोष ने राजनीति में कदम रखा। साल 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस को एक युवा और लोकप्रिय महिला चेहरे की जरूरत थी। सयानी घोष इस भूमिका के लिए उपयुक्त मानी गईं क्योंकि वह पहले से ही पूरे बंगाल में जानी-पहचानी थीं। इसी वजह से फरवरी 2021 में ममता बनर्जी ने उन्हें तृणमूल कांग्रेस में शामिल कराया। पार्टी में शामिल होते ही उन्हें तेजी से महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलने लगीं।
TMC में शामिल होने के बाद पार्टी ने सयानी घोष को आसनसोल विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया। हालांकि चुनाव में उन्हें भाजपा उम्मीदवार अग्निमित्रा पॉल के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद पार्टी नेतृत्व ने उन पर भरोसा बनाए रखा और उनकी राजनीतिक भूमिका लगातार बढ़ती गई।
साल 2021 में त्रिपुरा के स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान सयानी घोष राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आईं। बताया जाता है कि उन्होंने भाजपा की एक सभा के पास से गुजरते हुए "खेला होबे" का नारा लगाया था। इसके बाद उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि यह विवाद उनके राजनीतिक करियर के लिए नुकसानदायक साबित नहीं हुआ। इसके उलट, इस घटना के बाद उन्होंने तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व का और अधिक भरोसा हासिल किया।
त्रिपुरा प्रकरण के बाद सयानी घोष की राजनीतिक सक्रियता और बढ़ी। साल 2023 में ममता बनर्जी ने उन्हें तृणमूल कांग्रेस की युवा इकाई (यूथ विंग) का अध्यक्ष नियुक्त किया। यह पार्टी के भीतर उनके बढ़ते कद का संकेत माना गया। इसी दौरान पश्चिम बंगाल के कथित भर्ती घोटाले की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उनसे लगभग दस घंटे तक पूछताछ की थी। इसके बाद वह एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई थीं।
सयानी घोष के आक्रामक राजनीतिक तेवर और पार्टी में बढ़ते प्रभाव को देखते हुए तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें 2024 के लोकसभा चुनाव में जादवपुर सीट से उम्मीदवार बनाया। उन्होंने चुनाव में जीत हासिल की और पहली बार लोकसभा सांसद बनीं। इसके बाद उनकी पहचान बंगाल की युवा और प्रभावशाली नेताओं में होने लगी।
पिछले पांच वर्षों में सयानी घोष ने खुद को ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के करीबी नेताओं में शामिल किया। अपने भाषणों में वह अक्सर ममता बनर्जी का जिक्र करती रही हैं। कई मौकों पर उन्होंने कहा कि वह ममता बनर्जी को अपना राजनीतिक आदर्श मानती हैं। सयानी घोष की कार्यशैली और सार्वजनिक छवि में भी ममता बनर्जी की झलक दिखाई देती रही है। वह कई बार ममता की तरह साड़ी और साधारण चप्पल पहनकर राजनीतिक कार्यक्रमों में नजर आईं।
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