महिला आरक्षण बिल 28 वोट से गिरा, 11 साल में पहली बार मोदी सरकार सदन में फेल

Published : Apr 17, 2026, 08:00 PM ISTUpdated : Apr 17, 2026, 08:04 PM IST
Women Reservation Bill Fails in Lok Sabha by 28 Votes Government Misses Two Thirds Majority

सार

Women Reservation Bill: लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन बिल जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा पाया और 28 वोट से गिर गया। 11 साल में पहली बार मोदी सरकार कोई बिल पास नहीं करा सकी, 21 घंटे चली बहस में 130 सांसदों ने हिस्सा लिया।

संसद में लंबे समय से चर्चा में रहा महिला आरक्षण से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन बिल आखिरकार पास नहीं हो सका। यह सिर्फ एक बिल का गिरना नहीं है, बल्कि देश की राजनीति में एक बड़ा संदेश भी माना जा रहा है। लोकसभा में इस बिल को लेकर वोटिंग हुई, जिसमें सरकार जरूरी बहुमत जुटाने में पीछे रह गई। आंकड़ों पर नजर डालें तो तस्वीर साफ हो जाती है।

कितने वोट पड़े और कहां चूक हुई

इस बिल के पक्ष में 298 सांसदों ने वोट दिया, जबकि 230 सांसद इसके खिलाफ रहे। कुल 489 सांसदों ने वोटिंग में हिस्सा लिया। संविधान संशोधन बिल पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी होता है। यानी 489 का दो-तिहाई 326 वोट होता है। लेकिन सरकार को सिर्फ 298 वोट मिले, जो कि जरूरी आंकड़े से 28 वोट कम थे। इसी वजह से बिल पास नहीं हो सका और गिर गया।

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11 साल में पहली बार सरकार को झटका

यह घटना इसलिए भी अहम है क्योंकि पिछले 11 साल में पहली बार ऐसा हुआ है जब केंद्र सरकार लोकसभा में कोई अहम बिल पास नहीं करा पाई। इसे सरकार के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

अमित शाह का बयान और सियासी टकराव

वोटिंग से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने करीब एक घंटे तक भाषण दिया। उन्होंने साफ कहा था कि अगर यह बिल पास नहीं होता है तो इसकी जिम्मेदारी विपक्ष पर होगी। उन्होंने यह भी कहा कि देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनके अधिकारों के रास्ते में कौन खड़ा है। इस बयान के बाद सदन में माहौल और ज्यादा राजनीतिक हो गया।

21 घंटे की लंबी बहस, 130 सांसदों ने रखी बात

इस बिल पर लोकसभा में कुल 21 घंटे तक चर्चा चली। इस दौरान 130 सांसदों ने अपने विचार रखे, जिनमें 56 महिला सांसद भी शामिल थीं। इतनी लंबी चर्चा के बाद भी सहमति नहीं बन पाना इस बात का संकेत है कि महिला आरक्षण जैसे मुद्दे पर अभी भी राजनीतिक मतभेद काफी गहरे हैं।

अब सवाल यह है कि क्या सरकार इस बिल को दोबारा लाएगी या इसमें कुछ बदलाव करके फिर से पेश करेगी। वहीं विपक्ष भी इसे अपने तरीके से राजनीतिक मुद्दा बना सकता है। फिलहाल इतना साफ है कि महिला आरक्षण जैसे अहम मुद्दे पर संसद में सहमति बनाना आसान नहीं है, और आने वाले समय में यह मुद्दा और ज्यादा गरमा सकता है।

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राहुल गांधी का बयान यहां सुनें 

 

 

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