लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े तीन संविधान संशोधन बिल 21 घंटे की लंबी चर्चा के बाद भी पास नहीं हो सके। मतदान के दौरान बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि विपक्ष में 230 सांसदों ने वोट किया। हालांकि, इन बिलों को पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोट जरूरी थे, लेकिन सरकार इस आंकड़े तक नहीं पहुंच सकी। कुल 528 सांसदों ने मतदान में हिस्सा लिया और आखिरकार 54 वोटों से यह बिल गिर गया। यह पहली बार माना जा रहा है जब मोदी सरकार लोकसभा में कोई महत्वपूर्ण बिल पास कराने में सफल नहीं हो पाई।