
जम्मू: तिहाड़ जेल में बंद अलगाववादी नेता और प्रतिबंधित संगठन 'जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट' (JKLF) के चीफ यासीन मलिक ने एक ऐसा बयान दाखिल किया है जिसने सभी को चौंका दिया है। 1990 के चर्चित कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट मर्डर केस में मलिक ने ऐलान किया है कि वह अब इस मुकदमे में अपना बचाव नहीं करेगा। उसने कोर्ट से सीधे तौर पर कहा है कि उस पर मौत की सजा यानी फांसी पर विचार कर लिया जाए। इसके साथ ही मलिक ने अपनी पाकिस्तानी पत्नी मुशाल हुसैन मलिक के साथ 16 साल पुराने रिश्ते को भी खत्म करने यानी तलाक देने का फैसला सुना दिया है।
उम्रकैद की सजा काट रहे यासीन मलिक ने अपने वकील अबू आदिल पंडित के जरिए श्रीनगर की एडिशनल सेशंस कोर्ट में 25 पन्नों का एक लिखित जवाब दाखिल करवाया है। इस मामले में अब अगली सुनवाई 19 सितंबर को होनी है। अपने इस लंबे-चौड़े बयान में मलिक ने लिखा है कि वह सरला भट मर्डर केस की कानूनी कार्यवाही को आगे नहीं चुनौती देगा। हालांकि उसने यह भी जोड़ दिया कि इसे उसका जुर्म कबूलना न माना जाए। मलिक का दावा है कि राजनीतिक कारणों से उसे फंसाया गया था, लेकिन अब उसने 'इस्तिखारा' (इस्लामिक प्रार्थना) करने के बाद ही यह फैसला लिया है कि वह और मुकदमा नहीं लड़ेगा।
यासीन मलिक ने अपने बयान में कहा कि वह सरला भट्ट हत्याकांड से जुड़ी मौजूदा कानूनी कार्यवाही को आगे चुनौती नहीं देना चाहते। उन्होंने अदालत से अपने लिए capital punishment यानी मृत्युदंड पर विचार करने को भी कहा। हालांकि, मलिक ने साथ ही साफ किया कि मुकदमे का बचाव नहीं करने के उनके फैसले को अपराध स्वीकार करने या अभियोजन के आरोपों को मान लेने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा कार्यवाही राजनीतिक परिस्थितियों का नतीजा है और उन्हें इस मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है। मलिक के मुताबिक, उन्होंने यह फैसला काफी सोच-विचार और ‘इस्तिखारा’ के बाद लिया है।
YASIN MALIK CHOOSES DEATH PENALTY, DIVORCE
Separatist leader Yasin Malik has told a Srinagar TADA/POTA court he will not contest trial proceedings in the murder case of Kashmiri Pandit nurse Rubaiya Bhat, instead seeking capital punishment.
In an affidavit, Malik said the… pic.twitter.com/Tj9WqnST51— Rahul Shivshankar (@RShivshankar) September 2, 2026
सरला भट्ट श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) में स्टाफ नर्स थीं। अप्रैल 1990 में कश्मीर घाटी में उग्रवाद के दौर के बीच उनका अपहरण कर लिया गया था। कुछ दिन बाद उनका शव बरामद हुआ। उनकी हत्या ने कश्मीरी पंडित समुदाय के बीच डर और असुरक्षा को और गहरा कर दिया था। यह मामला तीन दशक से ज्यादा समय तक लंबित रहा। बाद में जम्मू-कश्मीर की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) ने मामले को फिर से जांच के दायरे में लिया। 2026 में दाखिल चार्जशीट में यासीन मलिक समेत कई लोगों के नाम शामिल किए गए।
SIA की चार्जशीट में यासीन मलिक के अलावा खुर्शीद अहमद चाल्कू, अब्दुल हमीद शेख, मोहम्मद यूसुफ सूफी और गुलाम मोहम्मद टपलू के नाम भी शामिल हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, चाल्कू अभी फरार है, जबकि सूफी, शेख और टपलू की मौत हो चुकी है। ऐसे में इस मामले में यासीन मलिक प्रमुख जीवित आरोपियों में से एक है। फिलहाल मलिक दिल्ली की तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है। यह सजा उसे 2017 के टेरर-फंडिंग मामले में मिली थी।
यासीन मलिक ने इसी बयान में अपनी पाकिस्तानी पत्नी मुशाल हुसैन मलिक से अलग होने का फैसला भी बताया। दोनों की शादी 2009 में हुई थी और उनकी एक बेटी रजिया सुल्ताना है। मलिक ने दावा किया कि पिछले करीब आठ वर्षों से वह अपनी पत्नी और परिवार से सामान्य तरीके से संपर्क नहीं कर पाए हैं। उनके मुताबिक, फोन या वीडियो कॉल के जरिए भी पत्नी से बातचीत की अनुमति नहीं मिली। उन्होंने अपने बयान में कहा कि वह नहीं चाहते कि मुशाल उनकी परिस्थितियों का बोझ अपनी पूरी जिंदगी उठाती रहें या उनके कारण खुद को विधवा की तरह जीवन जीने के लिए मजबूर समझें। उन्होंने मुशाल से सम्मान और उम्मीद के साथ अपनी जिंदगी का नया अध्याय शुरू करने की अपील की।
मलिक ने अपनी बेटी रजिया सुल्ताना के लिए भी भावुक संदेश लिखा। उन्होंने बेटी से अपनी दादी यानी मलिक की मां का ख्याल रखने और हर दिन कम से कम पांच मिनट उनसे बात करने की अपील की।उन्होंने परिवार से लंबे समय तक दूर रहने और उनके साथ समय नहीं बिता पाने पर अफसोस भी जताया। 25 पन्नों का यह बयान सिर्फ कानूनी पक्ष तक सीमित नहीं रहा। इसमें पत्नी, बेटी और मां के लिए लिखे गए व्यक्तिगत संदेश भी शामिल हैं।
यह पहली बार नहीं है जब यासीन मलिक ने किसी मामले में अभियोजन का विरोध नहीं करने का रुख अपनाया है। मई 2022 में दिल्ली की विशेष NIA अदालत ने उसे टेरर-फंडिंग मामले में दोषी ठहराया था। उस समय भी मलिक ने आरोपों का विरोध करने से इनकार किया था। बाद में अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई। अब सरला भट्ट हत्याकांड में उसके नए बयान ने मामले को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। हालांकि, मलिक की ओर से मृत्युदंड की मांग करना अपने आप में अदालत की ओर से मौत की सजा सुनाए जाने के बराबर नहीं है। इस मामले में आगे की कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगी।
यासीन मलिक का 25 पन्नों का बयान 2 सितंबर को श्रीनगर की अदालत में पेश किया गया। अब मामले में अगली सुनवाई 19 सितंबर को निर्धारित है। एक तरफ सरला भट्ट हत्याकांड में मलिक ने मुकदमे का आगे विरोध नहीं करने और अपने लिए मृत्युदंड की मांग की है, वहीं दूसरी तरफ उसने खुद को मामले में निर्दोष बताते हुए राजनीतिक साजिश का आरोप भी लगाया है। इसलिए अब अदालत की आगे की कार्यवाही इस मामले में अहम होगी।
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