
लखनऊ। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर स्पष्ट कहा कि सरकार के लिए केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि ठोस परिणाम ही असली कसौटी हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी मुद्दे पर बोलने से पहले उसके नतीजों को देखना जरूरी है। केवल लंबी बातें करने से फायदा नहीं होता अगर जमीन पर बदलाव न दिखे। इसी सोच के साथ उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं में हुए सुधार, इंसेफेलाइटिस पर नियंत्रण, मेडिकल ढांचे के विस्तार और भविष्य की हेल्थ इकोनॉमी की योजनाओं का विस्तार से उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय का उल्लेख करते हुए कहा कि इंसेफेलाइटिस के कारण पहले कई बच्चों की जान जाती थी और कई जिलों ने इसका कठिन दौर देखा है। उन्होंने कहा कि पहले सरकारों ने संवेदनशीलता नहीं दिखाई, जबकि इलाज के साथ मानवीय दृष्टिकोण भी जरूरी होता है।
उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और राज्य सरकार के प्रयासों से इंसेफेलाइटिस पर प्रभावी नियंत्रण हुआ है। सरकार ने माफिया के खिलाफ कार्रवाई की तरह ही इस बीमारी के खिलाफ भी सख्त कदम उठाए हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि “वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज” की दिशा में तेजी से काम हुआ है। मेडिकल कॉलेजों की संख्या 36 से बढ़कर 81 हो चुकी है और नए कॉलेजों पर काम जारी है।
एम्स गोरखपुर और रायबरेली में संचालित हैं, कई कॉलेजों में सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएं विकसित की गई हैं। डायलिसिस सुविधा हर जिले में मुफ्त उपलब्ध है। आयुष्मान भारत योजना के तहत करोड़ों गोल्डन कार्ड जारी किए गए हैं। जरूरतमंद मरीजों को बिना भेदभाव सहायता देने पर जोर दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि लगभग 42 हजार पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती हुई है और चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में भी हजारों नियुक्तियां की गई हैं। आईसीयू, डिजिटल एक्स-रे, ब्लड बैंक, ऑक्सीजन प्लांट जैसी सुविधाएं बढ़ाई गई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में मुख्यमंत्री आरोग्य मेले आयोजित किए जा रहे हैं। 108 और 102 एंबुलेंस सेवाओं से आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत हुई हैं।
सरकार एआई, जीनोमिक्स, टेलीमेडिसिन और हेल्थटेक जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ा रही है। ललितपुर में फार्मा पार्क और गौतम बुद्ध नगर में मेडिकल डिवाइस पार्क पर काम चल रहा है। इससे दवाइयों और मेडिकल उपकरणों की उपलब्धता और गुणवत्ता बेहतर होने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में महिलाओं की भागीदारी और आत्मनिर्भरता में बड़ा बदलाव आया है। पहले महिला वर्कफोर्स 12-13% थी, जो अब 36-37% तक पहुंच गई है। महिलाओं के लिए रोजगार, पेंशन योजनाएं, स्वयं सहायता समूह, बीसी सखी योजना और ड्रोन दीदी जैसे कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। महिलाओं की सुरक्षा और रोजगार दोनों क्षेत्रों में सुधार हुआ है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पुलिस में महिलाओं की संख्या 10,000 से बढ़कर 44,000 हो गई है। सरकारी नौकरियों में बड़ी संख्या महिलाओं को मिली है। अब महिलाएं नाइट शिफ्ट में भी सुरक्षित माहौल में काम कर रही हैं। सरकार उज्ज्वला योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, मातृ वंदना योजना, कन्या सुमंगला और सामूहिक विवाह योजना जैसे कार्यक्रमों के जरिए महिलाओं को सशक्त बना रही है।
दिव्यांगजनों को पेंशन, मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल और ई-ट्राईसाइकिल जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। डीबीटी के माध्यम से राशि सीधे खातों में पहुंच रही है ताकि पारदर्शिता बनी रहे। सरकार ने निराश्रित महिलाओं, वृद्धजनों और दिव्यांगजनों के लिए पेंशन बढ़ाने का भी संकेत दिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जीरो पॉवर्टी के लक्ष्य की ओर काम कर रही है। गरीबों को आवास, राशन, पेंशन और रोजगार योजनाओं से जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि लाखों गरीब परिवारों को पक्का घर मिला है और आवास निर्माण में अतिरिक्त सहायता भी दी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों की योजनाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले सहायता राशि कम थी और योजनाएं सीमित वर्ग तक पहुंचती थीं। वर्तमान सरकार व्यापक स्तर पर योजनाएं लागू कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार तुष्टिकरण नहीं बल्कि संतुष्टीकरण के मॉडल पर काम कर रही है, ताकि हर पात्र व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास योजनाओं के कारण करोड़ों लोग गरीबी से बाहर आए हैं। सरकार का लक्ष्य केवल आर्थिक सहायता नहीं बल्कि सामाजिक सुरक्षा, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के साथ समग्र विकास सुनिश्चित करना है। उन्होंने दोहराया कि सरकारी धन जनता का है और उसका उपयोग जनता के हित में ही होना चाहिए।
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