
मंडी(Himachal Pradesh). धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र से भाई रजत को भाजपा का टिकट मिलने से रूठी प्रदेश भाजपा महिला मोर्चा की महामंत्री रहीं वंदना गुलेरिया की नाराजगी अभी बरकरार है। उनके पिता एवं सूबे के जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह और माता प्रोमिला देवी वंदना को मनाते रहे, लेकिन वह नहीं मानीं। भाई को टिकट मिलने के बाद रिश्तों में इस तरह की दरार आ गई है कि माता-पिता को बेटे के प्रचार के लिए बेटी वंदना से गुहार लगानी पड़ रही है।
बता दें कि वंदना गुलेरिया हिमाचल प्रदेश के कद्दावर मंत्री रहे महेंद्र सिंह ठाकुर की बड़ी बेटी हैं। वह धर्मपुर से टिकट की दावेदार थीं, मगर BJP ने महेंद्र के बेटे और वंदना के भाई रजत ठाकुर को टिकट दिया। अपनी अनदेखी से भड़की वंदना गुलेरिया ने अपने समर्थकों के साथ पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया।
बेटी को मनाने पहुंचे जलशक्ति मंत्री
टिकट न मिलने से नाराज बेटी वंदना गुलेरिया को मनाने जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर पत्नी के साथ उसके घर चोलथरा पहुंचे। दोनों ने करीब एक घंटे तक वंदना गुलेरिया से बात की। बहन को मनाने उनके भाई व भाजपा प्रत्याशी रजत ठाकुर भी पहुंचे थे, लेकिन दोनों की बात नहीं हुई। वंदना के तीखे तेवरों के आगे किसी की एक नहीं चली। अंत में उनके माता-पिता उन्हें मनाने पहुंचे, काफी देर तक बातचीत के बाद वह थोड़ा शांत हुई।
सर्वे में था मेरा नाम, टिकट भाई को क्यों दिया- वंदना
मीडिया से बातचीत में वंदना ने कहा कि मैंने धर्मपुर सीट से पार्टी टिकट के लिए अप्लाई नहीं किया, लेकिन पार्टी के सर्वे में मैं वहां पहले नंबर पर आई थी। उसके बावजूद जब मेरी जगह मेरे भाई रजत ठाकुर को टिकट दिए जाने की खबर मिली तो मैं सोचती रह गई कि मुझे टिकट क्यों नहीं मिला। उन्होंने कहा कि सूबे की भाजपा सरकार एक तरफ महिला सशक्तिकरण का दम भरती है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देती है और दूसरी तरफ जब महिलाओं को आगे लाने की बात आती है तो उन्हें आने नहीं दिया जाता। वंदना ने पूछा कि अगर संसद में या विधानसभा में महिलाओं को आने ही नहीं दिया जाएगा तो उनकी बात आगे कौन रखेगा?
पिता की राजनीतिक विरासत के लिए चल रही जंग
जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर के परिवार पर धर्मसंकट अचानक नहीं आया है। पिता की राजनीतिक विरासत के लिए बेटे रजत ठाकुर व बेटी वंदना गुलेरिया में कई साल से अंदरखाने में जंग चल रही थी। शक्ति प्रदर्शन कर एक-दूसरे को नीचा दिखाने के प्रयास भी हो रहे थे। महेंद्र सिंह ठाकुर इससे आहत थे। बेटे को राजनीतिक विरासत सौंपे जाने पर बेटी विद्रोह कर सकती है, इसका उन्हें आभास था। पार्टी व समाज में फजीहत होने की चिंता उन्हें हमेशा सताती रहती थी।
दोनों के हैं अलग-अलग संगठन
संगठन में प्रदेश स्तर का दायित्व होने के बावजूद दोनों ने लोगों तक पहुंच बनाने के लिए अपने-अपने संगठन बनाए हैं। उनके माध्यम से दोनों धर्मपुर की जनता के बीच जाकर अपनी-अपनी बात रखते हैं। महेंद्र सिंह ठाकुर के अलावा भाजपा नेतृत्व भी इस बात से भलीभांति परिचित था। संगठन विवाद से बचने के लिए अंतिम समय तक महेंद्र सिंह को ही चुनाव में उतारने के लिए अड़ा हुआ था। महेंद्र सिंह के राजनीति से संन्यास की इच्छा को देखते हुए अंतत: उनके बेटे रजत ठाकुर को मैदान में उतारना पड़ा।
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