
पणजी : गोवा (Goa) में 16 मार्च को विधानसभा का कार्यकाल पूरा हो रहा है। इससे पहले नए कार्यकाल की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। विधायकों को मंगलवार को शपथ दिलाया जाएगा। इससे पहले आज बीजेपी विधायक गणेश गांवकर (Ganesh Gaonkar) ने विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर की शपथ ली है। राज्यपाल श्रीधरन पिल्लई ने गणेश गांवकर को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। लेकिन सबसे बड़ा सवाल अभी भी यही बना हुआ है कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? प्रमोद सावंत (Pramod Sawant) को एक बार फिर से कमान सौंपी जाएगी या किसी और के नाम पर मुहर लगेगी, इस पर सस्पेंस बरकरार है। बीजेपी हाईकमान के फैसले पर सभी की नजरें टिकीं हुई हैं।
बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी
गोवा विधानसभा चुनाव (Goa Chunav 2022) में 20 सीटें जीतकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) सबसे बड़ी पार्टी बनी है। तीन निर्दलीय और महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी के दो विधायकों की तरफ से बिना शर्त पार्टी को समर्थन पत्र मिल चुका है। अब प्रोटेम स्पीकर गणेश गांवकर 15 मार्च को 39 विधायकों को शपथ दिलाएंगे और विधानसभा के अध्यक्ष के चुनाव की सुविधा प्रदान करेंगे। मंगलवार को सुबह 11:30 बजे सभी विधायकों को सदन में बुलाया गया है।
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सीएम फेस को लेकर खींचतान
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पार्टी के भीतर सीएम फेस को लेकर खींचतान जारी है। शनिवार को बीजेपी के ही विधायक विश्वजीत प्रताप सिंह राणे (Vishwajit Pratapsingh Rane) अचानक राज्यपाल से मिलने पहुंचे थे। विश्वजीत राणे की पत्नी दिव्या राणे भी परवेम विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक हैं। दिव्या की तरफ से रविवार को एक मराठी भाषी अखबार में एक पेज का विज्ञापन दिया गया था। इस विज्ञापन में प्रमोद सावंत का चेहरा शामिल नहीं किया गया था। इस विज्ञापन में लिखा गया था कि गोवा के इतिहास में ऐसा कभी नहीं, कि कोई उम्मीदवार किसी भी पार्टी का 13 हजार 943 वोट के अंतर से जीत दर्ज करे। परवेम से बीजेपी उम्मीदवार दिव्य विश्वजीत राणे ने ये कीर्तिमान हासिल किया है, महिला शक्ति का उदय हुआ है। जिसके बाद इसे मुख्यमंत्री पद की दावेदारी के रुप में देखा गया।
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सीएम बनने की इच्छा जता चुके हैं विश्वजीत राणे
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विश्वजीत राणे पार्टी नेताओं के सामने मुख्यमंत्री बनने की इच्छा जता चुके हैं। 2019 में भी मनोहर पर्रिकर (Manohar Parrikar) के निधन के बाद गोवा में नया मुख्यमंत्री बनाया जा रहा था, उस वक्त भी विश्वजीत राणे ने अपनी दावेदारी पेश की थी। लेकिन बाद में उन्हें स्वास्थ्य मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई। बता दें कि विश्वजीत के पिता प्रताप सिंह राणे कांग्रेस (Congress) के कद्दावर नेता हैं और 9 बार लगातार विधायक रह चुके हैं। तीन बार मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं।
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