दाहोद में पीएम मोदी की रैली : जहां कांग्रेस की गहरी पैठ, वहीं सेंधमारी की तैयारी, जानिए क्या है सियासी मायने

Published : Apr 20, 2022, 08:30 AM ISTUpdated : Apr 20, 2022, 08:50 AM IST
दाहोद में पीएम मोदी की रैली : जहां कांग्रेस की गहरी पैठ, वहीं सेंधमारी की तैयारी, जानिए क्या है सियासी मायने

सार

इस रैली में 20 हजार करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण पीएम मोदी करेंगे। 1419 करोड़ के विकासकार्य आदिवासियों को समर्पित किया जाएगा। 550 करोड़ से ज्यादा के विकासकार्यों का शिलान्यास भी प्रधानमंत्री करेंगे। इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए दाहोद, पंचमहाल, छोटा उदेपुर और महीसागर जिले का गांवों में घर-घर न्योता दिया गया है। 

अहमदाबाद : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के गुजरात दौरे का आज आखिरी दिन है। बुधवार को पीएम दाहोद (Dahod) में रैली करेंगे। यहां पीएम मोदी 9 हजार एचपी इलेक्ट्रिक इंजन उत्पादन यूनिट प्लांट का शिलान्यास करेंगे। इसका फायदा यहां के आदिवासियों को होगा। इस प्लांट से बड़ी संख्या में लगभग 10 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल सकेगा। प्रधानमंत्री इसके साथ ही जिले में 550 करोड़ रुपए की पीने के पानी की सप्लाई, 175 करोड़ की लागत के दुधीमाता नदी के प्रोजेक्ट और 300 करोड़ की लागत से बनने वाले दाहोद स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की भी सौगात देंगे। यहां होने वाली पीएम मोदी की रैली के जरिए बीजेपी (BJP) आदिवासी वोटबैंक को अपने पाले में लाने की कवायद में है।

कांग्रेस के वोटबैंक पर नजर
दाहोद में आदिवासी वोटबैंक का अच्छा खासा दबदबा है। यह वोटबैंक कांग्रेस का कोर वोटबैंक माना जाता है। राजनीतिक जानकार बताते हैं कि राज्य में पिछले पांच साल में सरकार के कई प्रोजेक्ट से आदिवासी खासा नाराज हैं। इसलिए उनकी नाराजगी खत्म करने पीएम के दाहोद दौरा बेहद खास माना जा रहा है। यह भी एक फैक्ट है कि कई सालों से आदिवासी वोटबैंक कांग्रेस का माना जाता रहा है। ऐसे में बीजेपी का फोकस है कि इस साल के आखिरी में होने जा रहे विधानसभा चुनाव में यह वर्ग उसके पाले में आ जाए और उसकी जीत का रास्ता साफ हो सके।

गुजरात में आदिवासी वोटबैंक का दबदबा
राज्य की आबादी का 15 प्रतिशत आदिवासी हैं। यहां की 27 सीटों पर जीत हार का फैसला यही वर्ग करता रहा है। यही कारण है कि सभी राजनीतिक दल इन्हें अपनी तरफ लाने पूरी कोशिश करते दिखाई देते रहे हैं। यहां के पांच जिलों में इनकी अच्छी खासी संख्या है। इनमें बनासकांठा, साबरकांठा, अरवल्ली, महिसागर, पंचमकाल दाहोद, छोटाउदेपुर, नर्मदा, भरूच , तापी, वलसाड, नवसारी, डांग, सूरत शामिल है। यहां की जीत-हार का फैसला आदिवासी समाज ही करता आया है।

कांग्रेस के करीब, बीजेपी से दूरी
गुजरात में पिछले कई चुनावों से आदिवासी समाज कांग्रेस के काफी करीब रहा है। यही कारण है कि चुनाव में कांग्रेस को इस समाज का वोट मिलता रहा है। 182 सीटों वाली विधानसभा में साल 2007 में जिन 27 सीटों पर आदिवासियों का प्रभाव है, उनमें से कांग्रेस (Congress) ने 14 सीटों पर जीत दर्ज की थी। 2012 के चुनाव में कांग्रेस को 16 सीटें मिलीं। 2017 में उसके पाले में फिर 14 सीट आई। यही कारण है कि राजनीतिक जानकार इस समाज को कांग्रेस के करीब मानते हैं। यही कारण है कि पीएम की यहां होने जा रही रैली काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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