होम मिनिस्टरी ने किया साफ, कश्मीर में हालात सुधरते ही छोड़े जाएंगे हिरासत में लिए गए नेता

Published : Nov 15, 2019, 05:44 PM IST
होम मिनिस्टरी ने किया साफ, कश्मीर में हालात सुधरते ही छोड़े जाएंगे हिरासत में लिए गए नेता

सार

जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद-370 के अधिकतर प्रावधानों को खत्म करने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने के पांच अगस्त के फैसले के बाद गृह मामलों की स्थाई समिति की यह पहली बैठक थी। 

नई दिल्ली: गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने शुक्रवार को संसद के दोनों सदनों के सदस्यों को बताया कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में हालात सामान्य हो रहे हैं और हिरासत में लिए गए नेताओं को धीरे-धीरे रिहा किया जा रहा है। हालांकि सूत्रों ने कहा कि बाकी नेताओं को छोड़ने के लिए कोई समयसीमा नहीं बताई जा सकती।

कांग्रेस नेता आनंद शर्मा की अध्यक्षता वाली गृह मामलों की स्थाई संसदीय समिति की बैठक में सांसदों ने गृह सचिव अजय कुमार भल्ला और उनकी टीम के अधिकारियों से जम्मू-कश्मीर की मौजूदा स्थिति और हालात सामान्य करने के लिए उठाए जा रहे कदमों को लेकर सवाल पूछे।

जम्मू-कश्मीर में सामान्य हो रहे हैं हालात

जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद-370 के अधिकतर प्रावधानों को खत्म करने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने के पांच अगस्त के फैसले के बाद गृह मामलों की स्थाई समिति की यह पहली बैठक थी। सूत्रों के मुताबिक गृह सचिव ने सांसदों को बताया कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में हालात सामान्य हो रहे हैं, स्कूल खुल गए हैं और सेब का कारोबार हो रहा है। सूत्रों ने बताया कि हिरासत में लिए गए नेताओं को लेकर पूछे गए सवाल पर भल्ला और उनकी टीम के अधिकारियों ने कहा कि नेताओं को धीरे-धीरे रिहा किया जा रहा है लेकिन बाकी नेताओं को रिहा करने का समय पूछने पर उन्होंने कोई समयसीमा नहीं बताई।

गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने सांसदों से कहा कि जिन्हें जन सुरक्षा कानून (पीएसए) के तहत हिरासत में लिया गया है वे इसे अधिकृत न्यायाधिकरण में चुनौती दे सकते हैं और उसके आदेश से अंसतुष्ट होने पर हाई कोर्ट का रुख कर सकते हैं।

CM फारूख अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती अगस्त से हिरासत में 

उल्लेखनीय है कि जिन नेताओं को पीएसए के तहत हिरासत में लिया गया है उनमें पूर्व मुख्यमंत्री फारूख अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती शामिल हैं जो पांच अगस्त से ही हिरासत में है। सांसदों ने कश्मीर घाटी में इंटरनेट सेवाएं बंद करने को लेकर भी सवाल किए जिस पर अधिकारियों ने बताया कि यह प्रतिबंध आतंकवादियों को विध्वंसक कार्रवाई को अंजाम देने से रोकने और असामाजिक तत्वों को अफवाह फैलाने से रोकने के लिए लगाया गया है।

सांसदों को अधिकारियों ने बताया कि 1990 से अबतक जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी हिंसा की 71,254 घटनाएं हुई जिनमें 14,049 नागरिकों की मौत हो गई और 5,293 सुरक्षा कर्मी शहीद हो गए। इसी दौरान 22,552 आतंकवादी भी मारे गए।

(यह खबर समाचार एजेंसी भाषा की है, एशियानेट हिंदी टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है।)

PREV

Other Indian State News (अन्य राज्य समाचार) - Read Latest State Hindi News (अन्य राज्य की खबरें), Regional News, Local News headlines in Hindi from all over the India.

Recommended Stories

'धुरंधर' से प्रेरित गैंगस्टर 20 साल बाद गिरफ्तार-नकली रहमान डकैत की असली कहानी सुन पुलिस भी चौंकी?
कौन हैं राहुल मामकूटथिल? MLA पर तीसरे रेप केस का सच क्या है?