
लखीमपुर. कोरोना वायरस से बचाव के लिए पूरे देश को लॉकडाउन किया गया है ताकि लोगों को संक्रमण से सुरक्षित किया जा सके। इस दौरान ना कोई गाड़ी चल रही है और ना ही कोई ट्रेन। इस कारण कई लोग जो अपने घर से बाहर काम करने के लिए गए थे वे फंस गए है। जिसके बाद वे पैदल ही अपने घर की ओर निकल पड़े हैं। असम से भी एक ऐसा ही वाक्या सामने आया है जहां 80 साल के एक बुजुर्ग को अपने घर लौटने के लिए 100 किलोमीटर से ज्यादा पैदल चलना पड़ा।
बेटे को लाने गए थे गुवाहाटी
दरअसल, असम के लखीमपुर जिले के रहने वाले खगेन बरूआ, बहू की तबीयत खराब हो जाने के कारण अपने बेटे को लाने के लिए गुवाहाटी गए थे। जिसके बाद उन्होंने वापसी के लिए गुवाहाटी से ट्रेन पकड़ी, जिससे वो नगांव जिले के कालियाबोर तक पहुंच गए। इस बीच देश में लॉकडाउन की घोषणा हो गई।
तबीयत बिगड़ने पर स्थानीय लोगों ने कराया अस्पताल में भर्ती
लॉकडाउन के कारण सभी ट्रेंनों के साथ गाड़ियों भी बंद कर दिया गया। बरूआ को अभी भी कालियाबोर से घर जाने के लिए 215 किलोमीटर का सफर तय करना था। जिसके बाद उन्होंने तय किया कि वे पैदल ही इस दूरी को पार करेंगे। जब वे काललियाबोर से करीब 100 किलोमीटर बिस्वानाथ चरियाली पहुंच तो उन्हें कमजोरी महसूस होने लगी। जिसके बाद उन्होंने बिस्वानाथ चरियाली के ही रेलवे स्टेशन पर रात गुजारी। लेकिन जब स्थानीय लोगों ने बरूआ की हालत को देखा तो उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। साथ ही पुलिस को सूचित किया।
बेटे से भी नहीं हो पाया संपर्क
पुलिस ने जब बरूआ से पुछा तो उन्होंने बताया कि बहू गर्भवती थी। इस कारण से वे बेटे को गुवाहाटी से लाने के लिए गए थे। लेकिन लॉकडाउन होने की वजह से उससे भी संपर्क नहीं हो पाया। जिसके बाद बिस्वानाथ जिला पुलिस ने बरूआ को पुलिस वाहन से उनके घर पहुंचाया। साथ ही कुछ नगदी भी दी।
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