
वडोदरा, गुजरात. यह हैं गुजरात के वडोदरा के रहने वाले दिव्यांग शिवम सोलंकी। जो लोग शारीरिक तौर पर सक्षम होते हैं, वे भी अकसर मुसीबत के वक्त हौसला खो देते हैं, लेकिन शिवम बुलंद हौसलों के एक उदाहरण हैं। एक हादसे में अपने दोनों हाथ-पैर खोने के बाद भी शिवम ने खुद को लाचार बनाकर नहीं छोड़ा। बल्कि अपने हौसलों के बूते फिर खड़े हुए और अपने ज्यादातर काम खुद करते हैं। पढ़ाई में भी शिवम एक अच्छे स्टूडेंट माने जाते हैं। 10वीं में ये 81 प्रतिशत अंक लाए थे। इस बार शिवम 12 वीं का एग्जाम दे रहे हैं। शिवम को भरोसा है कि वे 12वीं में अच्छे नंबर लाएंगे।
वडोदरा के बरानुपरा इलाके में रहने वाले शिवम ने बताया कि जब वे 13 साल के थे, तब छत पर पतंग उड़ा रहे थे। अचानक वे बिजली के तारों पर गिर पड़े। करंट से दोनों हाथ-पैर बुरी तरह झुलस गए थे। उनकी जान बचाने डॉक्टरों को दोनों हाथ-पैर काटने पड़े। हालांकि इस हादसे ने उन्हें मायूस कर दिया था। लेकिन फिर खुद का हौसला बढ़ाया।
शिवम बताते हैं कि उन्होंने कलाइयों के सहारे लिखना शुरू किया। माता-पिता ने बच्चे के हाथ के हिस्से में पट्टी बांधकर उसमें पैन फंसाकर लिखकी की प्रैक्टिस कराई। धीरे-धीरे शिवम की प्रैक्टिस अच्छी हो गई।
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