
देहरादून। उत्तराखंड (Uttrakhand) के एक सरकारी स्कूल (Government School) में कुछ स्कूली छात्रों ने मिड्डेमील (Mid Day Meal) का खाना खाने से साफ इंकार कर दिया है। इन छात्रों ने जो वजह बताई है, वो बेहद चौंकाने वाली है। इतना ही नहीं, अभिभावक भी अपने बच्चों से इत्तेफाक रखते हैं और इसका सरकार पर दोष मढ़ते हैं। फिलहाल, जब मामले ने तूल पकड़ा तो जांच बैठा दी गई है। जिला शिक्षा अधिकारी ने प्रधानाचार्य से मामले में रिपोर्ट तलब की है। मामला चंपावत (Champawat) जिले के सूखीढांग इंटर कॉलेज (Sukhidhang Government Inter College) का है।
ये पूरा विवाद जातिगत आधारित भोजन माता (रसोइया) की नियुक्ति को लेकर है। इस मामले में एक तरफ प्रधानाचार्य नियमों का हवाल दे रहे हैं तो दूसरी तरफ अभिभावक संघ का आरोप है कि नियुक्ति एक सवर्ण (upper caste) भोजन माता की होनी थी, लेकिन प्रस्ताव के खिलाफ दलित वर्ग (Dalit category woman) की महिला को नियुक्त कर दिया गया और ये सब जानबूझकर किया गया है ताकि सवर्ण वर्ग के बच्चे स्कूल में मिड्डेमील नहीं खा सकें।
दलित महिला के हाथों बना खाने से किया इंकार
दरअसल, चंपावत जिले के इस इंटर कॉलेज में 60 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। इनमें से 40 सामान्य वर्ग के हैं और 20 अनुसूचित जाति से हैं। कुछ दिन पहले स्कूल की भोजन माता शकुंतला देवी सेवानिवृत्त हो गई थीं, जिसके बाद विद्यालय प्रबंध समिति ने नई भोजन माता के तौर पर अनुसूचित जाति की सुनीता देवी को नियुक्त किया। इस बीच, शनिवार को स्कूल के सामान्य वर्ग के छात्रों ने भोजन माता सुनीता देवी के हाथों बना मिड्डे मील खाने से इनकार कर दिया।
सामान्य वर्ग के छात्र ज्यादा तो भोजन माता भी इसी वर्ग से हो
बीते रोज सामान्य वर्ग के बच्चों के अभिभावक स्कूल पहुंचे और सुनीता देवी की नियुक्ति को लेकर बवाल काटा। अभिभावकों का कहना था कि स्कूल में सामान्य वर्ग के छात्र बहुमत में हैं, इसलिए भोजन माता की नियुक्ति भी इसी वर्ग से की जानी चाहिए। अभिभावक चाहते हैं कि भोजन माता के रूप में सामान्य वर्ग की महिला की नियुक्ति की जाए। उनका आरोप है कि प्रधानाचार्य प्रेम सिंह ने मनमाने तरीके से सुनीता देवी को भोजन माता के रूप में नियुक्त किया है। उन्हें कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों के लिए मिड्डे मील तैयार करने का काम सौंपा गया है।
दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे
मामले में बीएसए ने जांच के आदेश दिए। जांच अधिकारी उपखंड शिक्षा अधिकारी अंशुल बिष्ट ने कॉलेज के प्रधानाचार्य से पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की। 22 दिसंबर को विवाद में शामिल दोनों पक्षों को बयान दर्ज करने के लिए चंपावत बुलाया है। प्रिंसिपल सिंह ने बताया कि सुनीता की ज्वाइनिंग के पहले दिन सवर्ण जाति के स्टूडेंट्स ने भोजन किया था। हालांकि, दूसरे दिन से उन्होंने भोजन का बहिष्कार शुरू कर दिया। स्टूडेंट्स ऐसा क्यों कर रहे हैं, यह समझ से परे है।
सरकारी मानदंडों के हिसाब से नियुक्ति हुई: प्रिंसिपल
प्रिंसिपल ने कहा कि सभी सरकारी मानदंडों के हिसाब से नियुक्ति की गई है। उन्होंने बताया कि हमें भोजनमाता के पद के लिए 11 आवेदन मिले थे। दिसंबर के पहले सप्ताह में आयोजित अभिभावक शिक्षक संघ और स्कूल प्रबंधन समिति की ओपन मीटिंग में उनका चयन किया गया था। बता दें कि सरकारी स्कूलों में स्टूडेंट्स की अटेंडेंस बढ़ाने और उन्हें पौष्टिक आहार देने के लिए मिड्डे मील की व्यवस्था की गई है। यह नियम भी तय किए गए हैं कि गांव की विधवा, गरीब और दलित महिला को नियुक्ति में प्राथमिकता दी जाए।
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