उत्तराखंड में छोटे दलों को अपने पाले में लाने की कवायद, एक AAP के साथ तो एक का सपा में हो चुका है विलय

Published : Jan 03, 2022, 02:43 PM ISTUpdated : Jan 11, 2022, 02:12 PM IST
उत्तराखंड में छोटे दलों को अपने पाले में लाने की कवायद, एक AAP के साथ तो एक का सपा में हो चुका है विलय

सार

आम आदमी पार्टी के अलावा बीजेपी और कांग्रेस भी छोटे दलों को अपने साथ लाने की कवायद में जुटे हैं। इसी कड़ी में पहाड़ी पार्टी का विलय आम आदमी पार्टी तो उत्तराखंड क्रांति दल डेमोक्रेटिक का विलय सपा में हो चुका है।

देहरादून : उत्तराखंड (Uttarakhand Election 2022) में अगले महीने होने जा रहे चुनाव से पहले कई छोटे दल बड़े दलों के शामिल हो सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ज्यादातर दलों का फोकस आम आदमी पार्टी (AAP) पर है। जिस तरह से पार्टी संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) युवाओं और महिलाओं पर फोकस कर रहे हैं, उससे छोटे दलों को लग रहा है कि इस बार राज्य में कोई बड़ा उलटफेर हो सकता है। वैसे आम आदमी पार्टी के अलावा बीजेपी और कांग्रेस भी छोटे दलों को अपने साथ लाने की कवायद में जुटे हैं। इसी कड़ी में पहाड़ी पार्टी का विलय आम आदमी पार्टी तो उत्तराखंड क्रांति दल डेमोक्रेटिक का विलय सपा में हो चुका है।

सियासी दलों की मौजूदा स्थिति
उत्तराखंड की बात करें तो वर्तमान में 6 राष्ट्रीय दल, अन्य राज्यों के चार मान्यता प्राप्त दल और 36 गैर मान्यता प्राप्त रजिस्टर्ड दल चुनाव मैदान में ताल ठोकने की तैयारी में हैं। चूंकि चुनाव नजदीक है, ऐसे में चुनावी प्रचार भी तेजी से हो रहा है। बात करें छोटे दलों की तो यह देखने में आया है कि ये दल अधिकांश चुनावी मौसम में ही सिर उठाते हैं। चुनावों में भले ही इन दलों को जीत हासिल न हुई हो लेकिन ये दल कई सीटों में हार-जीत का समीकरण पूरी तरह बिगाड़ देते हैं। बीते चुनावों में भी इन दलों व निर्दलीय प्रत्याशियों ने कई सीटों पर चुनावी गणित बिगाड़ा था। भाजपा और कांग्रेस के अलावा जो अन्य दो सीटें शेष के खाते में गई थीं, वे निर्दलीय ही थे। पिछले चुनावों के आंकड़ों को देखते हुए अब बड़े राजनीति दल इन पर डोरे डालने लगे हैं।

पिछले चुनाव में छोटे दलों की भूमिका
साल 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में छोटे दलों और निर्दलीयों को मिले कुल वोट भाजपा और कांग्रेस को मिले वोट के बाद तीसरे नंबर पर रहे। इस चुनाव में भाजपा को 46.51, कांग्रेस को 33.49 और बसपा को 6.98 प्रतिशत वोट मिले थे। इनके अलावा निर्दलीय को 10.41 प्रतिशत और अन्य को 3.06 प्रतिशत वोट मिले। प्रतिशत में यह संख्या काफी कम नजर आ रही है लेकिन यह वोट प्रतिशत 10 से अधिक सीटों पर हार-जीत के समीकरण बिगाड़ गया।

14 फरवरी को वोटिंग
उत्तराखंड में 14 फरवरी को मतदान होगा। इसके लिए 21 जनवरी को अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। 28 जनवरी को नामांकन की आखिरी तारीख है। 29 जनवरी को नामांकन की स्क्रूटनी होगी और 31 जनवरी तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। 14 फरवरी को पूरे प्रदेश में वोट डाले जाएंगे। इसके नतीजे 10 मार्च को आएंगे। पिछली बार यानी 2017 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश में 15 फरवरी को वोट डाले गए थे, जबकि वोटों की गिनती 11 मार्च को हुई थी।  

 

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