
नई दिल्ली। बिहार में हाल ही में करीब 16 साल बाद एक ऐसे शख्स को गिरफ्तार किया गया है, जिसने एक दो नहीं बल्कि 302 फर्जी हाेमियोपैथिक डॉक्टर बनाने में मदद की थी। अब पुलिस के सामने उससे भी बड़ी चुनौती इन सभी 302 डॉक्टरों को खोजना और उन्हें गिरफ्तार करना है। पता नहीं ये सभी फर्जी डॉक्टर आज कहां और कैसे लोगों का इलाज कर रहे हैं।
दरअसल, मामला बिहार के मुजफ्फरपुर का है। यहां एक परीक्षा सहायक को गिरफ्तार किया है जिसने बैचलर ऑफ मेडिसिन एंड होमियोपैथी सर्जरी के 302 फेल परीक्षार्थियों को पास करा दिया था। ये सभी अब डॉक्टर बन गए हैं। BHMS यानी बैचलर ऑफ मेडिसिन एंड होमियोपैथी सर्जरी के एग्जाम में ऑन्सर शीट में फर्जीवाड़ा कर फेल परीक्षार्थियों को पास करा दिया गया था। इस मामले में 16 साल बाद पुलिस ने उस समय के परीक्षा सहायक को गिरफ्तार किया। यह शख्स रिटायर होने के बाद भी संविदा पर काम कर रहा था।
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रिटायर होने के बाद भी काम कर रहा था
पुलिस अधिकारी रामनाथ प्रसाद के अनुसार, आरोपी व्यक्ति का नाम अमरेश सिंह है। इस केस में यूनिवर्सिटी से जुड़े आठ पदाधिकारी और परीक्षा पास होने वाले 302 परीक्षार्थी भी शामिल हैं। 8 में 4 की मौत हो चुकी है। एक गिरफ्तार हो चुका है। तीन को खोजा जा रहा है। ये शायद रिटायर हो चुके हैं। 302 उन परीक्षार्थियों की तलाश भी हो रही है।पुलिस ने अमरेश को गिरफ्तार कर लिया है। वह रिटायर होने के बाद भी काम कर रहा था।
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राज्यपाल ने कहा- एफआईआर कराओ
बता दें कि वर्ष 2006 में बीएचएमएस की परीक्षा आयोजित हुई थी। इसमें गलत तरीके से 302 परीक्षार्थियों को पास कराया गया था। गलत नंबर दिए गए थे। मामला राज्यपाल के पास पहुंचा। उन्होंने तुरंत एफआईआर के आदेश दिए। तब तत्कालीन कुलसचिव अशोक श्रीवास्तव के बयान पर केस दर्ज हुआ था। तब से इस मामले को दबा दिया गया था।
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