23 जनवरी की रात शनि राशि बदलकर धनु से मकर में प्रवेश कर चुके हैं। इससे पहले 26 जनवरी 1637 को मौनी अमावस्या पर शनि का मकर राशि में प्रवेश हुआ था।
उज्जैन. काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के ज्योतिषाचार्य पंडित गणेश मिश्रा के अनुसार, मौनी अमावस्या पर शनि का ये राशि परिवर्तन 382 साल बाद हुआ है। इससे पहले 26 जनवरी 1637 को मौनी अमावस्या पर शनि का मकर राशि में प्रवेश हुआ था।
अमावस्या पर हुआ था शनिदेव का जन्म पंडित मिश्रा के अनुसार, शनिदेव का जन्म ज्येष्ठ मास की अमावस्या पर हुआ था, यह इस साल 22 मई को है। इसलिए ज्योतिष शास्त्र के हिसाब से अमावस्या पर शनि का राशि परिवर्तन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शुक्रवार को अमावस्या होने से इसे शुभ माना गया है। अब 29 अप्रैल 2022 को शनि राशि बदलेगा और कुंभ में प्रवेश करेगा।
क्या होती है साढ़ेसाती और ढय्या?
शनि की साढ़ेसाती और ढय्या दोनों अलग-अलग स्थिति है। ढय्या यानी ढाई साल का समय। साढ़ेसाती यानी ढाई-ढाई साल के तीन चरण। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, शनि एक राशि में ढाई साल तक रहता है।
इस दौरान शनि की साढ़ेसाती उस राशि पर तो रहेगी, उसके साथ ही आगे वाली एक राशि और पीछे वाली एक राशि पर भी रहेगी। इस तरह एक बार में तीन राशियां साढ़ेसाती के प्रभाव में रहती हैं।
जब शनि किसी राशि में प्रवेश करता है तो उस पर साढ़ेसाती के पहले ढाई साल पूरे हो चुके होते हैं और दूसरा चरण शुरू हो जाता है। अगली राशि पर साढ़ेसाती के शुरुआती ढाई साल होते हैं।
ढय्या का मतलब जिस राशि पर शनि की वक्र दृष्टि होती है और जिस राशि में शनि होता है उससे छठी राशि पर शनि की ढय्या होती है।
12 में से 7 राशियां सीधे प्रभावित होंगी
मकर राशि में शनि के आने से कुंभ राशि पर साढ़ेसाती शुरू हो जाएगी। धनु और मकर राशि पर पहले से साढ़ेसाती चल रही मिथुन और तुला राशि पर शनि की ढय्या रहेगी।
यानी तुला राशि पर शनि की टेढ़ी नजर रहेगी और मिथुन राशि के साथ षडाष्टक योग बनेगा। मीन और कर्क राशि पर भी शनि की दृष्टि रहेगी। इस तरह 12 में से 7 राशियां पूरी तरह शनि से प्रभावित रहेंगी।
वृश्चिक, वृष और कन्या राशि को राहत
शनि की चाल बदलने से वृश्चिक राशि से साढ़ेसाती खत्म होगी। वृष और कन्या राशि वाले भी शनि की ढय्या से मुक्त हो जाएंगे।
शनि के राशि परिवर्तन होने से धनु राशि पर साढ़ेसाती तो रहेगी, लेकिन इस राशि वालों पर शनि का अशुभ प्रभाव नहीं रहेगा।
धनु राशि पर साढ़ेसाती के आखिरी ढाई साल होने से तरक्की, पद, प्रतिष्ठा और धन लाभ के योग बन रहे हैं।
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