
उज्जैन. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हमारे नक्षत्र में रोज कुछ न कुछ परिवर्तन जरूर होता है लेकिन इसके बारे में बहुत कम लोग जान पाते हैं। पंचांग में इसके बारे में जानकारी जरूर दी जाती है। पंचांग के अनुसार, राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त का समय भी रोज बदलता है। पंचांग के ही माध्यम से शुभ मुहूर्तों की जानकारी हमें प्राप्त होती है। हिंदू धर्म में पंचाग का प्रचलन हजारों साल पहले से किया जा रहा है। पंचांग में न सिर्फ शुभ मुहूर्त बल्कि ग्रह-नक्षत्रों की गतियों के बारे में बताया गया है। आगे जानिए पंचांग से जुड़ी खास बातें…
7 अगस्त का पंचांग (Aaj Ka Panchang 7 August 2022)
7 अगस्त 2022, दिन रविवार को श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि रहेगी। इस दिन सूर्योदय अनुराधा नक्षत्र में होगा जो शाम 04.30 तक रहेगा, इसके बाद ज्येष्ठा नक्षत्र रात अंत तक रहेगा। रविवार को पहले अनुराधा नक्षत्र होने से मृत्यु और उसके बाद ज्येष्ठा नक्षत्र होने से काण नाम के 2 अशुभ योग इस दिन बनेंगे। इनके अलावा इस दिन ब्रह्म और इंद्र नाम के 2 शुभ योग भी रहेंगे। इस दिन राहुकाल शाम 05:24 से 07:01 तक रहेगा। इस दौरान कोई भी शुभ काम न करें।
ग्रहों की स्थिति कुछ इस प्रकार रहेगी...
रविवार को शुक्र ग्रह मिथुन से निकलकर कर्क राशि में प्रवेश करेगा। इस दिन चंद्रमा वृश्चिक राशि में, बुध ग्रह सिंह राशि में, सूर्य कर्क राशि में, शनि मकर राशि (वक्री), मंगल-राहु मेष राशि में, गुरु मीन राशि में (वक्री) और केतु तुला राशि में रहेंगे। रविवार को पश्चिम दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए। यदि करनी पड़े तो दलिया, घी या पान खाकर ही घर से निकलें।
7 अगस्त के पंचांग से जुड़ी अन्य खास बातें
विक्रम संवत- 2079
मास पूर्णिमांत- श्रावण
पक्ष- शुक्ल
दिन- रविवार
ऋतु- वर्षा
नक्षत्र- अनुराधा और ज्येष्ठ
करण- तैतिल और गर
सूर्योदय - 6:03 AM
सूर्यास्त - 7:01 PM
चन्द्रोदय - Aug 07 2:38 PM
चन्द्रास्त - Aug 08 1:34 AM
अभिजीत मुहूर्त - 12:06 PM – 12:58 PM
7 अगस्त का अशुभ समय (इस दौरान कोई भी शुभ काम न करें)
यम गण्ड - 12:32 PM – 2:09 PM
कुलिक - 3:47 PM – 5:24 PM
दुर्मुहूर्त - 05:17 PM – 06:09 PM
वर्ज्यम् - 09:40 PM – 11:08 PM
न्यायाधीश है शनि ग्रह
ज्योतिष शास्त्र में शनि ग्रह का विशेष महत्व बताया गया है। यह ग्रह मकर और कुंभ राशि का स्वामी है। तुला शनि की उच्च राशि है जबकि मेष नीच। शनि ढाई साल में राशि बदलता है। ज्योतिष में शनि ग्रह को आयु, दुख, रोग, पीड़ा, विज्ञान, तकनीकी, लोहा, खनिज तेल, कर्मचारी, सेवक, जेल आदि का कारक माना जाता है। 9 ग्रहों में शनि की गति सबसे मंद है। शनि ग्रह, कुंडली में स्थित 12 भावों पर अलग-अलग तरह से प्रभाव डालता है।
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