देवताओं के धनाध्याक्ष हैं कुबेर देव, रावण ने इन्हीं से छिनी थी सोने की लंका

Published : Dec 09, 2019, 08:41 PM IST
देवताओं के धनाध्याक्ष हैं कुबेर देव, रावण ने इन्हीं से छिनी थी सोने की लंका

सार

धर्म ग्रंथों के अनुसार, रावण के दो भाई थे कुंभकर्ण और विभीषण। ये बात सभी जानते हैं, लेकिन रावण के सौतेले भाई के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। 

उज्जैन.धर्म ग्रंथों के अनुसार, रावण के दो भाई थे कुंभकर्ण और विभीषण। ये बात सभी जानते हैं, लेकिन रावण के सौतेले भाई के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। ग्रंथों में इनका नाम कुबेर बताया गया है। कुबेर राजाओं के अधिपति तथा धन के स्वामी हैं। वे देवताओं के धनाध्यक्ष के रूप मे जाने जाते हैं। इसीलिए इन्हें राजाधिराज भी कहा जाता है।

ऐसे बने रावण के सौतेले भाई
वाल्मीकि रामायण के अनुसार, महर्षि पुलस्त्य ब्रह्माजी के मानस पुत्र थे। उनका विवाह राजा तृणबिंदु की पुत्री से हुआ था। महर्षि पुलस्त्य के पुत्र का नाम विश्रवा था। विश्रवा मुनि का विवाह इड़विड़ा से हुआ। महर्षि विश्रवा के पुत्र का नाम वैश्रवण रखा गया। वैश्रवण का ही एक नाम कुबेर है। महर्षि विश्रवा की एक अन्य पत्नी का नाम कैकसी था। वह राक्षसकुल की थी। कैकसी के गर्भ से ही रावण, कुंभकर्ण व विभीषण का जन्म हुआ था। इस प्रकार रावण कुबेर का सौतेला भाई हुआ।

कुबेर की थी सोने की लंका
रामायण के अनुसार, कुबेर को उनके पिता मुनि विश्रवा ने रहने के लिए लंका प्रदान की। ब्रह्माजी ने कुबेर की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें उत्तर दिशा का स्वामी व धनाध्यक्ष बनाया था। साथ ही, मन की गति से चलने वाला पुष्पक विमान भी दिया था। रावण जब विश्व विजय पर कुबेरदेव के उसका भयंकर युद्ध हुआ। कुबेरदेव को हराकर रावण ने लंका पर अधिकार कर लिया।

पांडव भी रुके थे कुबेरदेव के महल में
महाभारत के अनुसार, जिस समय पांडव वनवास के दौरान बदरिकाश्रम में रह रहे थे। तब एक दिन भीम गंधमादन पर्वत पर पहुंच गए। वहां कुबेरदेव का महल था। एक मनुष्य को वहां आया देख कुबेरदेव के सेवकों ने भीम पर हमला कर दिया। भीम ने उन सभी का वध कर दिया। जब कुबेरजी को ये बात पता चली तो वे बहुत क्रोधित हुए, लेकिन जब उन्होंने युधिष्ठिर को देखा तो उनका क्रोध शांत हो गया। पांडवों ने वह रात कुबेरजी के महल में ही बिताई।


 

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