बद्रीनाथ मंदिर कब खुलेगा, किसके पास हैं इसकी चाबियां? 4 फैक्ट जो कर देंगे हैरान

Published : Apr 16, 2026, 03:18 PM IST
Badrinath Temple Facts

सार

Badrinath Temple Facts: उत्तराखंड के 4 धामों में से एक है बद्रीनाथ। हर साल यहां लाखों भक्त दर्शन करने आते हैं। इस मंदिर से जुड़ी अनेक मान्यताएं और परंपराएं हैं जो इसे और भी खास बनाती हैं। ये मंदिर सिर्फ 6 महीनों के लिए ही खुला रहता है।

Badrinath Mandir Kab Khulega: उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है यानी देवताओं की भूमि। उत्तराखंड में अनेक प्राचीन और रहस्यमयी मंदिर हैं। इन्हीं में से एक बद्रीनाथ मंदिर, ये उत्तराखंड के चार धामों के साथ-साथ देश के चार धामों में से भी एक है। शीत ऋतु के दौरान ये मंदिर बंद रहता है। वैशाख मास में अक्षय तृतीया के बाद बद्रीनाथ के कपाट खोले जाते हैं। इस बार बद्रीनाथ मंदिर के कपाट 23 अप्रैल 2026 को दर्शनार्थियों के लिए खोले जाएंगे। जानें इस मंदिर से जुड़ी 5 रोचक बातें…

ये भी पढ़ें-
Akshaya Tritiya 2026: सोना, चांदी या कुछ और, गुड लक के लिए राशि अनुसार क्या खरीदें?

किसके पास होती हैं बद्रीनाथ मंदिर की चाबी?

बद्रीनाथ धाम के कपाट किसी एक नहीं बल्कि 3 चाबियों से खुलते हैं। ये तीनों चाबियां किसी एक व्यक्ति के पास नहीं अलग-अलग लोगों के पास होती है। पहली चाबी उत्तराखंड के टिहरी राज परिवार के राज पुरोहित के पास, दूसरी बद्रीनाथ धाम के हक हकूकधारी मेहता लोगों के पास और तीसरी चाबी हक हकूकधारी भंडारी लोगों के पास होती है। इन तीनों चाबी के एक साथ प्रयोग करने पर ही बद्रीनाथ मंदिर के कपाट खुलते हैं।

ये भी पढ़ें-
राहु दे रहा है अशुभ फल? तुरंत पहनें ये चमत्कारी रत्न, किस्मत चमकते देर नहीं लगेगी

सबसे पहले कौन करता है बद्रीनाथ मंदिर में प्रवेश?

बद्रीनाथ मंदिर जब खोला जाता है कि सबसे रावल यानी पुजारी प्रवेश करते हैं। पुजारी विधि-विधान से भगवान की प्रतिमा पर लगा सफेद कपड़ा हटाते हैं और इसके बाद विधि-विधान से पूजा करते हैं। पूरी प्रक्रिया होने के बाद ही आम भक्तों को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी जाती है।

कैसी है मंदिर में स्थापित प्रतिमा?

बद्रीनाथ मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। यहां भगवान विष्णु की एक मीटर ऊंची प्रतिमा ध्यान मुद्रा में स्थापित है। मंदिर में भगवान कुबेर देव और लक्ष्मी-नारायण की प्रतिमाएं भी हैं। मंदिर में भगवान विष्णु के पांच रूपों की पूजा होती है, इन्हें पंचबद्री कहते हैं। भगवान बद्रीनाथ के इन 4 स्वरूपों के नाम श्री योगध्यान बद्री, श्री भविष्य बद्री, श्री वृद्ध बद्री और श्री आदि बद्री।

क्यों मंदिर को कहते हैं बद्रीनाथ?

पौराणिक कथाओं की मानें तो सतयुग में इस स्थान पर भगवान विष्णु ने कठोर तप किया था। तपस्या के दौरान सूर्यदेव की गर्मी से बचाने के लिए देवी लक्ष्मी ने बेर के पेड़ के रूप में विष्णु की छाया प्रदान की। बेर का ही एक नाम बदरी है। इसलिए भगवान विष्णु ने इस स्थान को बद्रीनाथ के रूप में प्रसिद्ध होने का वरदान दिया था।


 

PREV

धार्मिक परंपराओं, मंदिरों, त्योहारों, यात्रा स्थलों और आध्यात्मिक ज्ञान से जुड़ी खबरें पढ़ें। पूजा पद्धति, पौराणिक कथाएं और व्रत-त्योहार अपडेट्स के लिए Religion News in Hindi सेक्शन देखें — आस्था और संस्कृति पर सटीक और प्रेरक जानकारी।

Read more Articles on

Recommended Stories

Amavasya Kab Ki Hai: 17 या 18 अप्रैल, कब है वैशाख अमावस्या? जानें सही डेट, मुहूर्त और उपाय
Masik Shivratri April 2026: अप्रैल में मासिक शिवरात्रि व्रत कब? जानें मंत्र-पूजा विधि और मुहूर्त