Bahula Chaturthi 2026: कब करें बहुला चतुर्थी व्रत? जानें मंत्र-मुहूर्त, पूजा विधि और चंद्रोदय का समय

Published : Aug 30, 2026, 10:34 AM IST
Bahula Chaturthi 2026

सार

Bahula Chaturthi 2026 Date: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि का विशेष महत्व धर्म ग्रंथों में बताया गया है। इसे बहुला चतुर्थी कहते हैं। इस बार ये व्रत अगस्त 2026 में किया जाएगा।

Bahula Chaturthi 2026 Kab Hai: धर्म ग्रंथों के अनुसार चतुर्थी तिथि के स्वामी भगवान श्रीगणेश हैं। इसलिए हर चतुर्थी तिथि पर इनकी पूजा की जाती है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को बहुला चतुर्थी कहते हैं। ये चतुर्थी साल की 4 प्रमुख चतुर्थी में से एक है, इसलिए इसका विशेष महत्व है। इस दिन महिलाएं भगवान श्रीगणेश और चंद्रमा की पूजा करती हैं। इसे संकष्टी चतुर्थी और हेरंब चतुर्थी भी कहते हैं। आगे जानिए इस बार बहुला चतुर्थी 2026 की सही डेट, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि सहित पूरी डिटेल…

कब है बहुला चतुर्थी 2026?

पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 31 अगस्त, सोमवार की सुबह 08 बजकर 51 मिनिट से शुरू होगी जो 1 सितंबर, मंगलवार की सुबह 07 बजकर 42 मिनिट तक रहेगी। चूंकि चतुर्थी तिथि का चंद्रमा 31 अगस्त, सोमवार को उदय होगा, इसलिए इसी दिन बहुला चतुर्थी का व्रत किया जाएगा।

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बहुला चतुर्थी 2026 शुभ मुहूर्त

बहुला चतुर्थी पर भगवान श्रीगणेश की पूजा का विधान है। इसके लिए शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं-
सुबह 06:12 से 07:46 तक
दोपहर 12:02 से 12:52 तक
दोपहर 02:00 से 03:34 तक
शाम 05:08 से 06:41 तक

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बहुला चतुर्थी 2026 चंद्रोदय का समय

बहुला चतुर्थी पर चंद्रमा की पूजा काविशेष महत्व है। बिना चंद्रमा की पूजा के ये व्रत पूर्ण नहीं माना जाता। पंचांग के अनुसार बहुला चतुर्थी पर चंद्रोदय रात 08 बजकर 29 मिनिट के बाद होगा। अलग-अलग स्थानों पर चंद्रोदय के समय में आंशिक अंतर आ सकता है।

बहुला चतुर्थी व्रत-पूजा विधि

- 31 अगस्त, सोमवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें। दिन भर व्रत के नियमों का पालन करें। ऊपर बताए गए शुभ मुहूर्त में भगवान श्रीगणेश की पूजा कर सकते हैं। इसके लिए पूरी पूजन सामग्री एक स्थान पर एकत्रित कर लें।
- शुभ मुहूर्त शुरू होने पर सबसे पहले भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा घर में किसी साफ स्थान पर लकड़ी के बाजोट पर स्थापित करें। कुमकुम से भगवान को तिलक लगाएं और फिर फूलों की माला पहनाएं। शुद्ध घी का दीपक भी जलाएं।
- इसके बाद अबीर, गुलाल, रोली, हल्दी, फूल, दूर्वा, नारियल आदि चीजें एक-एक करके भगवान को अर्पित करें। भगवान श्रीगणेश को भोग लगाएं। पूजा करते समय मन ही मन में ऊं गं गणपतये नम: मंत्र का जाप निरंतर करते रहें।
- पूजा के बाद विधि-विधान से भगवान श्रीगणेश की आरती करें। जब चंद्रमा उदय हो जाए जल से अर्घ्य दें, कुमकुम, फूल और चावल आदि चीजें अर्पित करें। इस प्रकार पूजा के बाद प्रसाद खाकर अपना व्रत खोलें और फिर भोजन करें।
- इस दिन अपनी इच्छा अनुसार जररूतमंदों को भोजन, कपड़े आदि दान भी करना चाहिए। इस प्रकार जो बहुला चतुर्थी का व्रत करता है, उसके घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है और हर मनोकामना पूरी हो सकती है।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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