Teja Dashami 2026 Date: इस बार तेजा दशमी का पर्व सितंबर 2026 में मनाया जाएगा। तेजाजी महाराज कौन थे, इनकी पूजा क्यों की जाती है? इसके बारे में कम ही लोगों को पता है। जानें 2026 में कब है तेजा दशमी?

Teja Dashami Kab Hai: तेजा दशमी का पर्व हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व देश के कई हिस्सों में मनाया जाता है, लेकिन राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत कुछ राज्यों में इसका खास महत्व है। तेजा दशमी के दिन तेजाजी महाराज के मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। भक्त तेजाजी महाराज को रंग-बिरंगी छतरियां चढ़ाकर पूजा करते हैं। आइए जानते हैं तेजाजी महाराज कौन थे और तेजा दशमी क्यों मनाई जाती है…

कब है तेजा दशमी 2026?

पंचांग के अनुसार इस बार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 20 सितंबर, सोमवार की शाम 05 बजकर 51 मिनिट से 21 सितंबर, सोमवार की रात 08 बजकर 01 मिनिट तक रहेगी। चूंकि दशमी तिथि का सूर्योदय 21 सितंबर, सोमवार को होगा, इसलिए इसी दिन ये पर्व मनाया जाएगा।

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कौन थे तेजाजी महाराज?

लोक मान्यता के अनुसार तेजाजी महाराज राजस्थान के प्रमुख लोक देवताओं में शामिल हैं। उनका जन्म राजस्थान के नागौर जिले के खरनाल गांव में हुआ था। बचपन से ही तेजाजी को साहसी और दूसरों की मदद करने वाला बताया जाता है। उनसे जुड़ी कई लोक कथाएं आज भी राजस्थान और आसपास के इलाकों में प्रचलित हैं।

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एक बार तेजाजी महाराज अपनी बहन को उसके ससुराल से लेने के लिए गए थे। वहां पहुंचने पर उन्हें पता चला कि कुछ डाकू उनकी बहन की गायों को लूटकर ले जा रहे हैं। यह सुनते ही तेजाजी महाराज गायों को छुड़ाने के लिए डाकुओं के पीछे निकल पड़े।
रास्ते में उन्हें भाषक नाम का एक खतरनाक सांप मिला। सांप तेजाजी महाराज को डंसना चाहता था। उस समय तेजाजी ने उससे कहा कि अभी उन्हें जाने दिया जाए। पहले वह अपनी बहन की गायों को डाकुओं से छुड़ाकर वापस लाएंगे और उसके बाद खुद लौटकर उसके पास आएंगे।
तेजाजी की बात पर सांप ने उन्हें जाने दिया। इसके बाद तेजाजी महाराज ने डाकुओं का सामना किया और उनसे गायों को छुड़ाकर अपनी बहन के घर पहुंचाया। इस दौरान युद्ध में उनके शरीर पर कई चोटें लग गई थीं।
गायों को सुरक्षित पहुंचाने के बाद तेजाजी महाराज अपना वादा निभाने के लिए वापस उसी सांप के पास पहुंचे। उनके शरीर पर जगह-जगह चोट के निशान और खून देखकर सांप ने कहा कि अब शरीर का कोई हिस्सा ऐसा नहीं बचा है, जहां वह उन्हें डंस सके।
तब तेजाजी महाराज ने अपनी जीभ आगे कर दी और सांप से वहीं डंसने के लिए कहा। उनकी वचनबद्धता से प्रसन्न होकर भाषक सर्प ने उन्हें आशीर्वाद दिया। लोक मान्यता है कि उसने कहा कि सर्पदंश से पीड़ित व्यक्ति अगर तेजाजी महाराज के नाम का धागा बांधेगा तो उस पर विष का असर नहीं होगा।
इसी लोक मान्यता के कारण तेजाजी महाराज की पूजा सर्पदंश से जुड़ी आस्था के साथ भी की जाती है। तेजा दशमी के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनके मंदिरों में पहुंचते हैं। जिन लोगों ने सर्पदंश से बचाव की मान्यता के तहत तेजाजी के नाम का धागा बांधा होता है, वे मंदिर पहुंचकर उसे खोलते हैं और तेजाजी महाराज को छतरी चढ़ाकर पूजा करते हैं।


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