
Bhishma Dwadashi 2026 Kab Hai: भीष्म पितामह महाभारत के सबसे प्रमुख पात्रों में से एक थे। ये देवनदी गंगा और राजा शांतनु की संतान थे। राजा शांतनु ने ही उन्हें इच्छा मृत्यु का वरदान दिया था। कुरुक्षेत्र में हुए युद्ध के दौरान अर्जुन ने भीष्म पितामह को घायल कर दिया था। इसके बाद भीष्म 58 दिनों तक बाणों की शय्या पर रहे। जब उन्होंने हस्तिनापुर को सुरक्षित हाथों में देखा तो माघ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर अपने प्राणों का त्याग किया। इसके बाद पांडवों ने द्वादशी तिथि पर उनका तर्पण और पिंडदान किया। इसी तिथि पर भीष्म द्वादशी का व्रत किया जाता है। इस बार ये तिथि 30 जनवरी, शुक्रवार को है। आगे जानिए इस दिन कैसे करें व्रत-पूजा…
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सुबह 08:33 से 09:55 तक
दोपहर 12:18 से 01:01 तक
दोपहर 12:40 से 02:02 तक
शाम 04:46 से 06:08 तक
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- 30 जनवरी, शुक्रवार की सुबह जल्दी उठें और स्नान आदि करने के बाद व्रत-पूजा का संकल्प लें। दिन भर कुछ भी खाएं-पीएं नहीं। अगर ऐसा करना संभव न हो तो फलाहार कर सकते हैं।
- इस दिन शुभ मुहूर्त में भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा करें। साफ स्थान पर चित्र स्थापित कर उस पर फूलों की माला पहनाएं। कुमकुम से तिलक करें और शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
- इसके बाद फल, पंचामृत, सुपारी, पान, दूर्वा आदि चीजें अर्पित करें। इच्छा अनुसार भोग लगाएं। ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा दें। किसी पवित्र नदी में स्नान कर जरूरतमंदों को दान भी करें।
- किसी ब्राह्मण के माध्यम से भीष्म पितामाह के निमित्त तर्पण-पिंडदान आदि करें। इससे भीष्म पितामह के साथ-साथ पूर्वजों की आत्मा को भी शांति मिलती है। पितृ दोष भी शांत होता है।
1. भीष्म द्वादशी पर गाय को हरा चारा खिलाएं, मछलियों के लिए तालाब में आटे की गोलियां डालें। पक्षियों के लिए छत पर दाना रखें।
2. ऊं नमो नारायणाय नम: मंत्र का जाप भी भीष्म द्वादशी पर करना चाहिए। इससे आपके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं।
3. भीष्म द्वादशी के दिन जरूरतमंदों को भोजन, कपड़ा आदि चीजों का दान करें। इससे भी आपको शुभ फल प्राप्त होंगे।
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