Bhogi Festival 2026: भोगी से क्यों होती है पोंगल की शुरुआत, जानिए क्यों जलाते हैं अलाव?

Published : Jan 12, 2026, 11:01 AM IST
Bhogi Festival 2026

सार

Bhogi 2026: भोगी पंडिगई 13 जनवरी को है, जानिए इसका धार्मिक महत्व क्या है और इसे क्यों पोंगल की शुरुआत माना जाता है, जानिए भोगी पर्व का इतिहास, परंपराएं और इस पर्व को दक्षिण भारत में मनाने का तरीका।

Bhogi Pandigai 2026: भोगी पंडिगई दक्षिण भारत का एक महत्वपूर्ण और पारंपरिक पर्व है, जो हर साल मकर संक्रांति से ठीक एक दिन पहले मनाया जाता है। यह त्योहार खास तौर पर तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। भोगी केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि जीवन में नई शुरुआत, पुराने बोझ को छोड़ने और सकारात्मक ऊर्जा को अपनाने का प्रतीक माना जाता है। साल 2026 में भोगी पंडिगई 13 जनवरी को मनाई जाएगी, जो चार दिवसीय संक्रांति या पोंगल उत्सव की शुरुआत होती है।

भोगी पंडिगई 2026: तिथि और शुभ समय

  • भोगी पंडिगई: मंगलवार, 13 जनवरी 2026
  • भोगी संक्रांति क्षण: 14 जनवरी 2026, दोपहर 03:13 बजे
  • मकर संक्रांति: बुधवार, 14 जनवरी 2026भोगी पंडिगई 2026: चार दिन का उत्सव कार्यक्रम
  • पहला दिन: भोगी पंडिगई
  • दूसरा दिन: मकर संक्रांति / पोंगल (पेड्डा पंडुगा)
  • तीसरा दिन: कानुमा पंडुगा / मट्टू पोंगल
  • चौथा दिन: मुक्कनुमा / कानुम पोंगल

भोगी पंडिगई का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

भोगी पंडिगई का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। यह पर्व फसल के मौसम की शुरुआत और तमिल कैलेंडर के मार्गशीर्ष (मार्गज़ी) महीने के अंतिम दिन के रूप में भी जाना जाता है। इस दिन लोग अपने जीवन से पुरानी और नकारात्मक चीजों को हटाकर नई उम्मीदों और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का संकल्प लेते हैं।

भोगी के दिन अलाव जलाने की परंपरा क्या है?

भोगी के दिन सुबह-सुबह भोगी मंटालु (अलाव) जलाने की परंपरा है। लोग पुराने कपड़े, बेकार घरेलू सामान और अनुपयोगी वस्तुएं आग में डालते हैं। मान्यता है कि इससे बीती हुई नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है। यह परंपरा बदलाव और आत्मशुद्धि का प्रतीक मानी जाती है।

भोगी पंडिगई कैसे मनाई जाती है?

तमिलनाडु: तमिलनाडु में भोगी पंडिगई पोंगल उत्सव की शुरुआत का संकेत देती है। लोग अपने घरों की सफाई करते हैं, रंग-बिरंगे कोलम बनाते हैं और सुबह-सुबह अलाव जलाकर त्योहार मनाते हैं।

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना: यहां भोगी को संक्रांति उत्सव की शुरुआत माना जाता है। परिवार के लोग एक साथ इकट्ठा होकर पारंपरिक रीति-रिवाज निभाते हैं और खुशियां साझा करते हैं।

कर्नाटक: हालांकि कर्नाटक में यह पर्व बहुत व्यापक रूप से नहीं मनाया जाता, लेकिन कुछ क्षेत्रों में भोगी से जुड़े अनुष्ठान देखे जाते हैं।

भोगी फेस्टिवल में छुपा है जीवन में आगे बढ़ने का संदेश

भोगी पंडिगई हमें सिखाती है कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए पुराने विचारों, आदतों और नकारात्मक भावनाओं को छोड़ना जरूरी है। यह त्योहार नई शुरुआत, उम्मीद और सकारात्मक बदलाव का संदेश देता है। इसी भाव के साथ भोगी पंडिगई पोंगल जैसे बड़े पर्व की नींव रखती है और पूरे उत्सव को खास बना देती है।

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Anita Tanvi

अनीता तन्वी। मीडिया जगत में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। मौजूदा समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर एजुकेशन सेगमेंट संभाल रही हैं। इन्होंने जुलाई 2010 में मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा और अपने करियर की शुरुआत प्रभात खबर से की। पहले 6 सालों में, प्रभात खबर, न्यूज विंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ह्यूमन एंगल और फीचर रिपोर्टिंग पर काम किया। इसके बाद, डिजिटल मीडिया की दिशा में कदम बढ़ाया। इन्हें प्रभात खबर.कॉम में एजुकेशन-जॉब/करियर सेक्शन के साथ-साथ, लाइफस्टाइल, हेल्थ और रीलिजन सेक्शन को भी लीड करने का अनुभव है। इसके अलावा, फोकस और हमारा टीवी चैनलों में इंटरव्यू और न्यूज एंकर के तौर पर भी काम किया है।Read More...
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