Chanakya Niti: पिता अपने बेटे के लिए और पत्नी पति के लिए कब बन जाते हैं दुश्मन?

Published : Jun 26, 2026, 03:27 PM IST
Chanakya Niti for Family

सार

Chanakya Niti in Hindi: आचार्य चाणक्य ने अपनी एक नीति में माता-पिता, पुत्र और पत्नी को विशेष परिस्थिति में दुश्मन बताया है। आगे जानिए क्या है ये नीति?

Chanakya Niti for Family: आचार्य चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में ऐसे लोगों के बारे में बताया है, जो जीवन में सुख के बजाय दुख और परेशानियों का कारण बन सकते हैं। आचार्य चाणक्य की नीतियां आज भी जीवन को सही दिशा देने वाली मानी जाती हैं। उन्होंने रिश्तों, धन, शिक्षा और परिवार से जुड़े कई महत्वपूर्ण सूत्र बताए हैं। उनका एक प्रसिद्ध श्लोक आज भी लोगों को सही निर्णय लेने की प्रेरणा देता है। चाणक्य नीति का एक प्रसिद्ध श्लोक है…

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श्लोक
ऋणकर्ता पिता शत्रुर्माता च व्यभिचारिणी।
भार्या रूपवती शत्रुः पुत्रः शत्रुरपण्डितः॥

अर्थ- कर्जदार पिता अपने पुत्र के लिए, व्याभिचार करने वाली माता अपनी संतान के लिए, अधिक रूपवान पत्नी अपने पति के लिए और मूर्ख पुत्र अपने माता-पिता के लिए शत्रु के समान है।

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कर्ज में डूबा पिता पुत्र का शत्रु

चाणक्य के अनुसार यदि पिता पर अत्यधिक कर्ज हो और उसकी जिम्मेदारी संतान पर आ जाए, तो उसकी पूरी जिंदगी आर्थिक परेशानियों में बीत सकती है। ऐसी स्थिति में पिता ही अपने पुत्र के लिए शत्रु बन जाता है। इसलिए हर व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार ही ऋण लेना चाहिए और वक्त पर उसे चुका देना चाहिए।

गलत आचरण वाली माता संतान की दुश्मन

जो स्त्री अपने कुल और परिवार की मर्यादा को ध्यान में रखते हुए गलत आचरण करे, वो अपनी संतान के लिए शत्रु के समान ही मानी गई है क्योंकि माता के कारण संतान को भी समाज में गलत नजरों से देखा जाता है और उनका मजाक भी बनाया जाता है। बच्चों के भविष्य पर भी इसका असर पड़ सकता है।

सुंदर पत्नी अपने पति की दुश्मन

चाणक्य यहां केवल सुंदर पत्नी की बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि ऐसी स्त्री की ओर संकेत कर रहे हैं जो परिवार की जिम्मेदारी छोड़कर सिर्फ अपने सौदंर्य पर ध्यान देती है। ऐसी स्थिति में पति पर घर के काम का बोझ बढ़ सकता है जिससे वैवाहिक जीवन में तनाव की स्थिति बनती है। इसलिए सुंदर पत्नी को पति का दुश्मन माना गया है।

मूर्ख संतान माता-पिता की शत्रु

आचार्य चाणक्य के अनुसार शिक्षा केवल डिग्री का नाम नहीं, बल्कि सही और गलत की पहचान कराने वाला ज्ञान है। यदि संतान शिक्षा और अच्छे संस्कारों से दूर रहती है, तो वह भविष्य में स्वयं के साथ-साथ पूरे परिवार के लिए भी कठिनाइयों का कारण बन सकती है। ऐसी संतान माता-पिता के लिए शत्रु समान मानी गई है।


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