
Lunar Eclipse 28 August 2026: 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के दिन आसमान में साल का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण होगा। खास बात यह है कि यह ग्रहण आंशिक चंद्र ग्रहण होगा, लेकिन भारत में इसे देखा नहीं जा सकेगा। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि ग्रहण कितने बजे लगेगा, क्या इसका रक्षाबंधन पर असर पड़ेगा और क्या भारत में सूतक काल मान्य होगा? जानिए 28 अगस्त 2026 को रक्षा बंधन के दिन लगने जा रहे चंद्र ग्रहण को लेकर मन में उठ रहे हर सवाल का सटीक जवाब।
खगोलीय गणना के मुताबिक 28 अगस्त को चंद्र ग्रहण का आंशिक चरण सुबह 8 बजकर 04 मिनट पर शुरू होगा। इसका अधिकतम प्रभाव करीब 9 बजकर 43 मिनट पर रहेगा, जबकि आंशिक ग्रहण का चरण लगभग 11 बजकर 21-22 मिनट पर खत्म हो जाएगा। इससे पहले उपच्छाया चरण सुबह करीब 6:55 बजे शुरू होगा और करीब 12:30 बजे तक चलेगा। नासा के आंकड़ों के अनुसार यह 2026 का दूसरा चंद्र ग्रहण है और इसकी अधिकतम अवस्था में पृथ्वी की छाया चंद्रमा के बड़े हिस्से को ढक लेगी। यह एक डीप पार्टियल लूनर एक्लिप्स होगा।
ग्रहण का समय भारतीय घड़ी के हिसाब से दिन में पड़ रहा है और उस दौरान भारत से चंद्रमा क्षितिज के ऊपर दिखाई नहीं देगा। इसलिए भारत के किसी हिस्से में यह चंद्र ग्रहण नजर नहीं आएगा। ग्रहण का दृश्य प्रभाव अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के कई हिस्सों समेत उन क्षेत्रों में देखा जा सकेगा जहां उस समय चंद्रमा आकाश में मौजूद होगा।
चूंकि 28 अगस्त का चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए धार्मिक परंपराओं के अनुसार भारत में ग्रहण से जुड़ा सूतक काल मान्य नहीं होगा। इसका मतलब यह है कि रक्षाबंधन के त्योहार पर ग्रहण की वजह से अलग से कोई रोक लागू नहीं होगी। राखी बांधने का समय स्थानीय पंचांग में दिए गए भद्रा और शुभ मुहूर्त के अनुसार तय कर सकते हैं।
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सामान्य धार्मिक मान्यता के अनुसार चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण से करीब 9 घंटे पहले शुरू माना जाता है। लेकिन जब ग्रहण संबंधित स्थान से दिखाई ही न दे, तो वहां सूतक मानने की परंपरा लागू नहीं होती। इसलिए भारत में 28 अगस्त 2026 के इस ग्रहण के लिए अलग से सूतक काल नहीं रहेगा।
रक्षा बंधन के दिन 28 अगस्त को राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक है। इस मुहूर्त की कुल अवधि करीब 3 घंटे 51 मिनट है। यानी रक्षाबंधन के दिन लगने जा रहा चंद्र ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा, जिसके कारण सूतक मान्य नहीं होगा और राखी का पर्व सामान्य धार्मिक नियमों के अनुसार मनाया जा सकेगा।
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