Chandra Grahan 2026: होली पर चंद्र ग्रहण के बाद दिखेगा ब्लड मून, कितनी देर रहेगा सूतक?

Published : Feb 05, 2026, 02:07 PM IST

Chandra Grahan 2026: इस बार होली पर चंद्र ग्रहण का संयोग बन रहा है। चंद्र ग्रहण समाप्त होने के बाद आसमान में लाल रंग का चंद्रमा दिखाई देगा, जिसे ब्लड मून कहा जाता है। कईं सालों में एक बार ऐसा संयोग बनता है।

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जानें चंद्र ग्रहण से जुड़ी रोचक बातें

Chandra Grahan 2026 Sutak Time: फाल्गुन मास की पूर्णिमा पर होलिका दहन किया जाता है और इसके अगले दिन धुरेड़ी (होली उत्सव) पर्व मनाया जाता है। इस बार होली उत्सव पर चंद्र ग्रहण का संयोग बन रहा है। ये ग्रहण भारत में कुछ देर के लिए दिखाई देगा, इसलिए यहां इसके सभी नियम जैसे सूतक आदि मान्य होंगे। ग्रहण के बाद चंद्रमा लाल रंग का दिखाई देगा जिसे ब्लड मून कहा जाता है। आगे जानिए चंद्र ग्रहण व ब्लड मून से जुड़ी बातें…


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कब होगा चंद्र ग्रहण 2026?

होली उत्सव पर होने वाला चंद्र ग्रहण साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण होगा। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी के अनुसार, इस बार होलिका दहन 2 मार्च, सोमवार को किया जाएगा। इसके अगले दिन यानी 3 मार्च, मंगलवार को होली उत्सव मनाया जाएगा। 3 मार्च को चंद्र ग्रहण दोपहर 03 बजकर 19 बजे से शुरू होगा जो शाम 06 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। भारत में ये चंद्रग्रहण लगभग 17 मिनिट के लिए दिखाई देगा। यह उदित चंद्र ग्रहण होगा।

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कब से कब तक रहेगा चंद्र ग्रहण का सूतक?

3 मार्च, मंगलवार को ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले इसका सूतक शुरू हो जाएगा जो ग्रहण के साथ ही समाप्त होगा। सूतक के दौरान बाहर निकलने, खाने-पाने, सोना नहीं चाहिए। साथ ही किसी धारदार व नोकदार चीज का उपयोग करने से बचना चाहिए। सूतक को अशुभ समय भी माना गया है।

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ग्रहण के बाद दिखेगा ब्लड मून

3 मार्च की शाम चंद्र ग्रहण समाप्त होने के बाद यानी शाम 6 बजे बाद चंद्रमा लाल रंग का दिखाई देगा। खगोलीय भाषा में इसे ब्लड मून कहा जाता है। ये एक दुर्लभ घटना है दो साल में 1 या 2 बार ही दिखाई देती है। सबसे बड़ी खास बात ये है कि ब्लड मून को बिना चश्मे से भी आप आसानी से देख सकते हैं। ये बहुत ही सुंदर और आकर्षक नजारा होता है।

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क्या होता है ब्लड मून?

खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार जब घूमते हुए पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच में आ जाती है, तो सूर्य की रोशनी चांद तक नहीं पहुंच पाती जिस वजह से चांद पर पूरी तरह अंधेरा नहीं होता बल्कि वह गहरे लाल या तांबे जैसे रंग में बदल जाता है। इसे ही ब्लड मून कहा जाता है।


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