Chandra Grahan 2026: सूतक काल में किन लोगों को है खाने की छूट?

Published : Mar 03, 2026, 10:53 AM IST

chandra grahan kab se lagega: 3 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण होगा। चंद्र ग्रहण से जुड़े अनेक नियम धर्म ग्रंथों में बताए गए हैं। जैसे चंद्र ग्रहण के दौरान और इसके सूतक काम में कुछ भी खाना-पीना नहीं चाहिए लेकिन कुछ लोगों को इन नियमों में छूट दी गई है।

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ध्यान रखें चंद्र ग्रहण से जुड़े ये नियम

grahan in march 2026 timings in hindi: साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च, मंगलवार को होगा। चूंकि ये चंद्र ग्रहण भारत में भी दिखाई देगा इसलिए इससे जुड़े सभी नियम जैसे सूतक आदि भी यहां मान्य होंगे। चंद्र ग्रहण का सूतक 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है। सूतक की शुरूआत से लेकर अंत तक कई नियमों का पालन करना जरूर माना गया है जैसे इस दौरान कुछ भी खाना-पीना नहीं चाहिए। इन नियमों में कुछ लोगों को छूट दी गई है। आगे जानिए कौन हैं वो लोग जिन्हें चंद्र ग्रहण के सूतक काल में खाने-पीने की छूट दी गई है…


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3 मार्च 2026 चंद्र ग्रहण सूतक टाइम

भारतीय समय के अनुसार, 3 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण दोपहर 03 बजकर 23 मिनिट से शुरू होगा जो शाम 06 बजकर 47 मिनिट तक रहेगा। इस चंद्र ग्रहण का सूतक 9 घंटे पहले यानी सुबग 06 बजकर 23 मिनिट से माना जाएगा जो ग्रहण के साथ ही समाप्त भी होगा। इस सूतक की कुल अवधि लगभग 12 घंटे की रहेगी। इस दौरान कुछ नियमों का पालन करना जरूरी माना गया है जैसे सूतक काल में कुछ भी खाना नहीं चाहिए।


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किन लोगों को है सूतक में खाने की छूट?

हमारे विद्वानों ने जब सूतक और ग्रहण के नियम बनाए तो व्यवहारिक दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए कुछ बातों का विशेष रूप से ध्यान रखा। वैसे तो चंद्र ग्रहण के सूतक काल में कुछ भी खाने की मनाही है लेकिन कुछ लोगों को इस नियम में छूट दी गई है। ये हैं बच्चे, रोगी और बुजुर्ग। यानी सूतक काल के दौरान भी ये लोग भोजन आदि कर सकते हैं।

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बच्चों, बुजुर्गों और रोगी के लिए कितने समय का सूतक?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आमतौर पर चंद्र ग्रहण का सूतक 9 घंटे पहले से शुरू हो जाता है और इसी के साथ इसके नियम भी पालन करना भी जरूरी होती है लेकिन बच्चों, रोगी और बुजुर्गों के लिए सिर्फ एक प्रहर यानी 3 घंटे का सूतक ही मान्य रहता है। यानी इनके लिए ग्रहण काल के दौरान का सूतक ही मान्य रहता है।

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क्यों बनाया गया ये नियम?

हमारे विद्वान चाहते थे कि लोक व्यवहार के दृष्टिकोण से सभी के लिए लंबे समय के सूतकों के नियमों का पालन उचित नहीं है। इसलिए उन्होंने बच्चों, बुजुर्गों और रोगियों को इसमें छूट दी क्योंकि ये तीनों ही नि:शक्त यानी कमजोर होते हैं। ये तीनों ही बिना भोजन किए ज्यादा समय तक नहीं रह सकते। इसी वजह से इन तीनों ही ग्रहण काल को छोड़कर सूतक के अन्य समय में भोजन आदि कर सकते हैं।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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