Astro Tips: कमाई का कितना हिस्सा दान देना चाहिए? जानें जरूरी नियम

Published : Feb 07, 2026, 04:42 PM IST
Astro Tips

सार

Daan karne se kya hota hai: हिंदू धर्म में दान हर व्यक्ति के लिए जरूरी बताया गया है। दान करने से न सिर्फ मान-सम्मान मिलता है बल्कि पुण्य लाभ भी मिलता है। दान से जुड़े अनेक नियम भी हमारे धर्म ग्रंथों में बताए गए हैं।

Daan Kyo Karna Chahiye: अनेक धर्म ग्रंथों में दान हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य बताया गया है। जो लोग दान नहीं करते उन्हें मृत्यु के बाद न तो मोक्ष मिलता है और न दूसरा जन्म। हिंदू परंपरा में दान को एक महत्वपूर्ण कर्तव्य और धर्म का अंग माना गया है। दान से जुड़े अनेक नियम भी विद्वानों ने बताए गए हैं जैसे हमें अपनी कमाई का कितना प्रतिशत हिस्सा दान करना चाहिए। दान करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए आदि। आगे जानिए दान से जुड़े कुछ जरुरी बातें…

ये भी पढ़ें-
Bhaumvati Amavasya: कब है भौमवती अमावस्या फरवरी 2026? जानें डेट, महत्व और शुभ मुहूर्त

कमाई का कितना हिस्सा दान करें?

धर्म ग्रंथों के अनुसार न्यायपूर्वक यानी ईमानदारी से कमाए गए धन का दसवां भाग दान करना चाहिए। यह एक कर्तव्य है, जिसे करने से ईश्वर प्रसन्न होते हैं।
न्यायोपार्जितवित्तस्य दशमोशेन धीमत:।
कर्तव्यो विनियोगश्च ईश्वरप्रीत्यर्थमेव च ॥
अर्थ- न्याय से उपार्जित धन का दशमांश बुद्धिमान व्यक्ति को दान करना चाहिए।

ये भी पढ़ें-
Sita Ashtami 2026: 9 या 10 फरवरी, कब है सीता अष्टमी? जानें डेट, पूजा विधि, मंत्र-मुहूर्त

किन लोगों को दान नहीं करना चाहिए?

धर्म ग्रंथों में ये भी बताया गया है दान किसे करना चाहिए और किसे नहीं? उसके अनुसार जो धन-धान्य से संपन्न हैं, वे ही दान देने के अधिकारी हैं। जो लोग निर्धन हैं और बड़ी कठिनाई से परिवार का पालन-पोषण करते हैं, उनके लिए दान देना जरूरी नहीं है। यदि कोई व्यक्ति अपने माता-पिता, पत्नी व बच्चों का पेट काटकर दान देता है तो उसे पुण्य नहीं बल्कि पाप मिलता है।

दान किसे देना चाहिए?

दान किसे देना चाहिए, इसके बारे में विद्वानों का कहना है कि दान हमेशा सुपात्र को ही दें, कुपात्र को दिया दान व्यर्थ जाता है। सुपात्र से अर्थ है जिसे दान की सबसे ज्यादा जरूरत है। दान में अन्न, जल, धन-धान्य, शिक्षा, गाय, बैल आदि दिए जाते हैं। शास्त्रों में भी इसके बारे में लिखा है-
दानं दमो दया क्षान्ति: सर्वेषां धर्मसाधनम् ॥
-याज्ञवल्क्यस्मृति, गृहस्थ
अर्थ- दान, अन्त:करण का संयम, दया और क्षमा सभी के लिए सामान्य धर्म साधन हैं।

दान कितने प्रकार का होता है?

नित्यदान- किसी के परोपकार की भावना और किसी फल की इच्छा न रखकर यह दान दिया जाता है।
नैमित्तिक दान- अपने पापों की शांति के लिए विद्वान ब्राह्मणों के हाथों पर यह दान रखा जाता है।
काम्य दान- संतान, जीत, सुख-समृद्धि और स्वर्ग प्राप्त करने की इच्छा से यह दान दिया जाता है।
विमल दान- जो दान ईश्वर की प्रसन्नता के लिए दिया जाता है।

 

PREV

धार्मिक परंपराओं, मंदिरों, त्योहारों, यात्रा स्थलों और आध्यात्मिक ज्ञान से जुड़ी खबरें पढ़ें। पूजा पद्धति, पौराणिक कथाएं और व्रत-त्योहार अपडेट्स के लिए Religion News in Hindi सेक्शन देखें — आस्था और संस्कृति पर सटीक और प्रेरक जानकारी।

Read more Articles on

Recommended Stories

Bhaumvati Amavasya: कब है भौमवती अमावस्या फरवरी 2026? जानें डेट, महत्व और शुभ मुहूर्त
Sita Ashtami 2026: 9 या 10 फरवरी, कब है सीता अष्टमी? जानें डेट, पूजा विधि, मंत्र-मुहूर्त