Dasha Mata Vrat 2026: कब करें दशा माता व्रत? जानें डेट, पूजा विधि, मंत्र और मुहूर्त सहित हर बात

Published : Mar 12, 2026, 10:29 AM IST
Dasha Mata Vrat 2026

सार

Dasha Mata 2026: चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में दशा माता की पूजा करने की परंपरा है। मान्यता है कि दशा माता पूजन करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और परेशानियां दूर होती हैं। दशा माता की पूजन हर स्त्री को करना चाहिए।

Dasha Mata Vrat 2026 Mai Kab Hai: धर्म ग्रंथों के अनुसार, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को दशा माता की पूजा की जाती है। दशा माता कोई और नहीं बल्कि देवी पार्वती का ही रूप हैं। ऐसी मान्यता है कि भी जो भी दशा माता की पूजा सच्चे मन से करता है, उसके जीवन में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है साथ ही घर की दशा यानी स्थिति में भी सुधार आता है। इस दिन त्रिवेणी (पीपल, बरगद और नीम) की पूजा भी की जाती है। आगे जानिए कब करें दशा माता की पूजा, शुभ मुहूर्त और कथा…

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कब करें दशा माता पूजा 2026?

पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि 13 मार्च, शुक्रवार की सुबह 06 बजकर 29 मिनिट से शुरू होगी जो 14 मार्च, शनिवार की सुबह 08 बजकर 11 मिनिट तक रहेगी। 13 मार्च को पूरे दिन दशमी तिथि होने से इसी दिन दशा माता की पूजा की जाएगी। वर्धमान और आनंद नाम के 2 शुभ योग भी इस दिन रहेंगे।

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इस विधि से करें दशा माता की पूजा

- 13 मार्च, शुक्रवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद व्रत-पूजा का संकल्प लें। दशा माता की पूजा सुबह करने की परंपरा है।
- शुभ मुहूर्त में अपने आस-पास स्थित किसी त्रिवेणी (नीम, पीपल और बरगद) वृक्षों की परिक्रमा करते हुए भगवान विष्णु के मंत्र बोलें।
- त्रिवेणी वृक्ष के नीचे शुद्ध घी का दीपक लगाएं। इसके बाद अबीर, गुलाल, कुंकुम, चावल, फूल आदि चीजें एक-एक कर अर्पित करें।
- पूजा के बाद त्रिवेणी के नीचे बैठकर नल-दमयंती की कथा सुननी चाहिए। बिना कथा सुने इस व्रत का पूरा फल नहीं मिलता।
- इसके बाद घर आकर मुख्य दरवाजे के दोनों ओर हल्दी-कुमकुम के छापे लगाएं। इस दिन बिना नमक का भोजन करना चाहिए।
- इस भी इस विधि से दशा माता की पूजा करता है, उसके घर की स्थिति कभी खराब नहीं होती और सुख-समृद्धि बनी रहती है।

ये है दशा माता व्रत की कथा

प्राचीन समय में नल नाम के एक पराक्रमी राजा थे, उनकी पत्नी का नाम दमयंती था। रानी दमयंती दशा माता की भक्त थी। एक बार जब राजा नल ने दशा माता का व्रत कर पूजा का धागा धागा गले में बांधा तो राजा नल ने उस धागे को निकालकर फेंक दिया। उसी रात दशा माता ने राजा नल के सपने में आकर कहा ‘तूने मेरा अपमान किया है, इसलिए तेरा अच्छा समय जा रहा है।’ इसके बाद राजा नल जुएं में अपनी सारी संपत्ति हार गए और उन्हें पत्नी सहित वन-वन में भटकना पड़ा। कुछ सालों बाद राजा को सपने में फिर दशा माता दिखाई दी। राजा नल ने उनसे क्षमा मांगी और कहा ‘मैं पत्नी सहित आपकी पूजा करूंगा।’ समय आने पर राजा नल ने दशा माता की विधि-विधान से पूजा की, ऐसा करने से उन्हें अपना राज्य पुन: मिल गया।


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इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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