
Devi Saraswati Aarti Lyrics In Hindi: धर्म ग्रंथों में देवी सरस्वती को ज्ञान, बुद्धि और संगीत की देवी माना गया है। इनकी कृपा से भी विद्यार्थियों को सफलता मिलती है। हर साल माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को देवी सरस्वती की पूजा कर बसंत पंचमी उत्सव मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी तिथि पर देवी सरस्वती प्रकट हुई थीं। इस बार ये उत्सव 23 जनवरी, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन देवी सरस्वती की पूजा के बाद आरती भी जरूर की जाती है। देवी सरस्वती की आरती कैसे करें? आगे जनिए पूरी विधि…
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बसंत पंचमी पर शुभ मुहूर्त में पहले देवी सरस्वती की विधि-विधान से पूजा करें। पूजा के बाद आरती करने का नियम है। सबसे पहले 4 बार देवी सरस्वती के चित्र के चरणों से आरती घुमाएं, इसके बाद 2 बार नाभि से, 1 बार चेहरे पर से और 7 बार पूरे शरीर से। इस तरह 14 आरती की थाली घूमाएं। शास्त्रों में आरती की यही विधि बताई गई है।
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जब भी किसी देवी-देवता की पूजा की जाती है तो अंत में आरती जरूर की जाती है। ऐसा कहते हैं कि जब हम किसी भगवान की पूजा करते हैं तो उनका आवाहन करके वहां बुलाते हैं। भगवान आकर हमारे द्वारा की गई पूजा को स्वीकार करते हैं और अंत में आरती कर उनका विसर्जन किया जाता है। इसलिए बिना आरती के कोई भी पूजा पूरी नहीं मानी जाती।
जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता।
सद्गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता।। जय सरस्वती...।।
चंद्रवदनि पद्मासिनी, द्युति मंगलकारी।
सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी।। जय सरस्वती...।।
बाएँ कर में वीणा, दाएं कर माला।
शीश मुकुट मणि सोहे, गल मोतियन माला।। जय सरस्वती...।।
देवि शरण जो आए, उनका उद्धार किया।
पैठि मंथरा दासी, रावण संहार किया।। जय सरस्वती...।।
विद्या ज्ञान प्रदायिनि ज्ञान प्रकाश भरो।
मोह, अज्ञान और तिमिर का, जग से नाश करो।। जय सरस्वती...।।
धूप दीप फल मेवा, मां स्वीकार करो।
ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो।।।। जय सरस्वती...।।
मां सरस्वती जी की आरती, जो कोई नर गावे।
हितकारी सुखकारी, ज्ञान भक्ति पावे।। जय सरस्वती...।।
Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
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