
Dhumavati Jayanti 2026 Kab Hai: धर्म ग्रंथों में देवी के अनेक स्वरूप बताए गए हैं। इनमें से कुछ रूपों की पूजा तंत्र-मंत्र में विशेष रूप से की जाती है। इनमें से एक देवी धूमावती भी हैं। हर साल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को देवी धूमावती की जयंती मनाई जाती है। इस बार ये पर्व 22 जून, सोमवार को मनाया जाएगा है। देवी धूमावती 10 महाविद्याओं में से एक हैं। खास बात ये है कि सुहागिन महिलाएं देवी के इस रूप की पूजा नहीं कर सकतीं। आगे जानिए कैसे करें देवी धूमावती की पूजा, शुभ मुहूर्त आदि डिटेल…
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सुबह 09:07 से 10:48 तक
दोपहर 12:02 से 12:55 तक
दोपहर 02:09 से 03:50 तक
शाम 05:30 से 07:11 तक
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- धूमावती जयंती की सुबह यानी 22 जून, सोमवार को सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद व्रत-पूजा का संकल्प लें। ऊपर बताए गए शुभ मुहूर्त में देवी धूमावती का चित्र घर में किसी साफ स्थान पर स्थापित कर पूजा शुरू करें।
- सबसे पहले कुमकुम से देवी के चित्र पर तिलक करें और फूलों की माला पहनाएं। शुद्ध घी की दीपक लगाएं। इसके बाद सिंदूर, कुमकुम, चावल, फल, धूप और वस्त्र आदि चीजें एक-एक करके देवी को अर्पित करते रहें।
- पूजा करते समय ऊं धूमावत्यै विद्महे संहारिण्यै धीमहि तन्नो धूमा प्रचोदयात् मंत्र का जाप भी करते रहें। पूजा के बाद देवी धूमवती को अपनी इच्छा के अनुसार भोग लगाएं। अंत में मां धूमावती की कथा सुनें और आरती करें।
- इस तरह मां धूमावती की पूजा से सभी पापों का नाश हो जाता है। तंत्र-मंत्र की सिद्धि के लिए देवी धूमावती की पूजा मुख्य रूप से की जाती है। देवी धूमावती की पूजा सुहागिन महिलाएं भूलकर भी न करें।
देवी धूमावती का स्वरूप विधवा स्त्री के समान है। इसलिए ऐसी मान्यता है कि इनकी नजर जिन पर भी पड़ती है उसके बुरे दिन शुरू हो जाते हैं और सौभाग्य में कमी आ सकती है। यही कारण है कि सुहागिन महिलाओं को देवी धूमावती की पूजा करने की मनाही है। देवी धूमावती का एक नाम अलक्ष्मी भी है।
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इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
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