
Dussehra 2026 Kab Hai: रावण को भले ही एक शक्तिशाली राजा और महान विद्वान के रूप में जाना जाता है, लेकिन उसके अहंकार और गलत कामों ने ही उसके विनाश का रास्ता तैयार किया। धार्मिक कथाओं में ऐसी कई महिलाओं का जिक्र मिलता है, जिन्होंने रावण को श्राप दिया था। मान्यता है कि इन श्रापों ने भी उसके अंत की कहानी में अहम भूमिका निभाई। आगे जानिए कौन-थीं ये महिलाएं और उन्होंने रावण को श्राप क्यों दिया…
धार्मिक कथा के अनुसार, माया रावण की पत्नी मंदोदरी की बड़ी बहन थी। माया के पति शंभर वैजयंतपुर के राजा थे। एक बार रावण वहां पहुंचा, उसी दौरान राजा दशरथ ने वैजयंतपुर पर आक्रमण कर दिया। युद्ध में शंभर की मृत्यु हो गई। पति की मौत के बाद जब माया सती होने की तैयारी कर रही थी, तब रावण ने उसे अपने साथ चलने के लिए कहा। माया ने उसके प्रस्ताव को ठुकरा दिया और श्राप दिया कि एक स्त्री ही रावण के विनाश का कारण बनेगी।
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एक अन्य धार्मिक कथा के मुताबिक, एक बार रावण अपने पुष्पक विमान से जा रहा था। रास्ते में उसकी नजर तपस्या कर रही एक सुंदर महिला पर पड़ी। रावण उसकी सुंदरता से मोहित हो गया और उसे अपने साथ ले जाने की कोशिश करने लगा। खुद को बचाने के लिए उस तपस्विनी ने अपने तपोबल से शरीर त्याग दिया। कथा के अनुसार, जाते-जाते उसने रावण को श्राप दिया कि एक स्त्री ही उसकी मृत्यु का कारण बनेगी।
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रामायण की कथा में शूर्पणखा का नाम प्रमुखता से आता है। बहुत कम लोग जानते हैं कि उसके पति विद्युतजिव्ह की मृत्यु रावण के कारण हुई थी। मान्यता के अनुसार, विद्युतजिव्ह कालकेय राजा का सेनापति था। रावण के विश्व विजय अभियान के दौरान कालकेय से युद्ध हुआ, जिसमें विद्युतजिव्ह मारा गया। पति की मौत से दुखी शूर्पणखा ने मन ही मन रावण के विनाश की कामना की।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, स्वर्ग की अप्सरा रंभा कुबेर के पुत्र नलकुबेर से मिलने जा रही थी। रास्ते में रावण ने उसे रोक लिया और उसके साथ दुर्व्यवहार किया। जब नलकुबेर को इस घटना का पता चला, तो उसने रावण को श्राप दिया कि अगर वह किसी महिला को उसकी इच्छा के विरुद्ध छूने या अपने अधीन रखने की कोशिश करेगा, तो उसका सिर फट जाएगा या उसे मृत्यु का सामना करना पड़ेगा। इसी श्राप से जुड़ी मान्यता के कारण रावण ने माता सीता को लंका के महल में रखने के बजाय अशोक वाटिका में रखा था।
रावण के अंत की कहानी में माता सीता की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है। रावण ने जब उनका हरण किया, तब विभीषण समेत कई लोगों ने उसे सीता को सम्मानपूर्वक श्रीराम के पास लौटाने की सलाह दी। लेकिन रावण ने किसी की बात नहीं मानी। इसके बाद श्रीराम और रावण के बीच युद्ध हुआ, जिसमें रावण और उसकी सेना का अंत हो गया। इस तरह माता सीता के हरण को लंका के विनाश की प्रमुख वजह माना जाता है।
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