
अनंत चतुर्दशी इस साल 25 सितंबर को मनाई जाएगी। इसी के साथ गणेश विसर्जन की तैयारियां भी शुरू हो गईं हैं। अगर आप 11 वें दिन बप्पा को विदाई देने वाले हैं और घर पर ही विसर्जन करना चाहते हैं लेकिन समझ नहीं आ रहा कहां से शुरुआत करें तो परेशान होने की आवश्यकता बिल्कुल भी नहीं है। यहां जानें उत्तर पूजा से लेकर पाथेय बांधने तक की परंपरा साथ ही विसर्जन के बाद क्या करना चाहिए।
विसर्जन करने से पहले बप्पा की अंतिम पूजा यानी उत्तर पूजा करें। इस दौरान गणपति को गंगाजल, फूल, दूर्वा, धूप, मोदक और लड्डू अर्पित करें। इसके बाद पूरे परिवार के साथ आरती करें और बप्पा से सुख-शांति की प्रार्थना करें।
गणपति रखने के दौरान जाने-अंजाने में हुई गलतियों की माफी मांगे। इसके लिए आप यह श्लोक भी कह सकते हैं-
विसर्जन के लिए दौरान यह प्रमुख विधि है। एक साफ लाल या सफेद रंग के कपड़े में मिश्री, सूखे मेवे रखकर छोटी सी पोटली तैयार करें। इसे ही पाधेय कहते हैं और यह गणेश प्रतिमा के पास रखी जाती है।
गणपति को विसर्जन से ले जाने से पहले उन्हें स्थान से थोड़ा आगे की ओर खिसकान की परंपरा है। माना जाता है कि इसके बाद बप्पा विदाई लेने के लिए तैयार होते हैं। इसके बाद श्रद्धापूर्वक बप्पा को विदाई दें और जयकारों संग विसर्जन के लिए निकलें।
घर पर विसर्जन के लिए पानी से भरे बड़े बर्तन का इस्तेमाल करें। साथ ही पानी में विसर्जित करने से पहले मूर्ति से प्लास्टिक या अन्य गैर सजावटी सामान हटा दें। अब विसर्जन स्थल पर पहुंचकर अंतिम आरती करें और कहें- "गणपति बप्पा मोरया, अगली बरस तू जल्दी आ"
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