
Ganesh Visarjan Story: इस बार गणेश उत्सव का समापन 25 सितंबर, शुक्रवार को होगा। इसी दिन लोग नम आंखों से अपने आराध्य भगवान श्रीगणेश को विदाई देंगे। 10 दिनों की भक्ति के बाद भगवान की प्रतिमा का विसर्जन दुखी करने वाला होता है लेकिन नियमों के स्थापित की गई अनुसार देव प्रतिमाओं का विसर्जन जरूरी है। 25 सितंबर को गणेश प्रतिमा विसर्जन के लिए दिन भर कईं शुभ मुहूर्त हैं। यहां जानिए कब करें गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन…
- सुबह 11 बजकर 54 मिनिट से दोपहर 12 बजकर 42 मिनिट तक (अभिजीत मुहूर्त)
- दोपहर 01 बजकर 49 मिनिट से शाम 06 बजकर 28 मिनिट तक
- शाम 06 बजकर 28 मिनिट से 07 बजकर 55 मिनिट तक
- रात 10 बजकर 49 मिनिट से 12 बजकर 17 मिनिट तक
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धर्म ग्रंथों के अनुसार पार्थिव यानी मिट्टी से बनी देव प्रतिमाओं का समय पर विसर्जन कर देना चाहिए नहीं तो उनमें दोष आने की संभावना बनी रहती है। अगर ये प्रतिमाएं कहीं से टूट-फूट जाएं तो इनकी नहीं करनी चाहिए। इसलिए हमारे पूर्वजों ने ये नियम बनाया कि पार्थिव गणेश प्रतिमाओं का अनंत चतुर्दशी के शुभ मौके पर विसर्जन कर देना चाहिए। इससे इन प्रतिमाओं की शुभता बनी रहती है। साथ ही ये परंपरा हमें ये संदेश भी देती है कि जो इस धरती पर आता है, उसका जाना भी निश्चित है। यहां कुछ भी स्थाई नहीं दे।
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भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा के विसर्जन से जुड़ी कई मान्यताएं और कथाएं प्रचलित हैं। इनमें एक कथा महर्षि वेदव्यास और भगवान गणेश से जुड़ी है। मान्यता के अनुसार, महर्षि वेदव्यास के कहने पर भगवान गणेश ने लगातार 10 दिनों तक महाभारत का लेखन किया था। लगातार काम करने के कारण उनके शरीर का ताप बढ़ गया था। तब महर्षि वेदव्यास ने उन्हें ठंडे पानी से स्नान करवाया। इसी मान्यता के आधार पर गणेश उत्सव के अंतिम दिन गणपति की प्रतिमा को नदी, तालाब या अन्य जल स्रोत में विसर्जित करने की परंपरा मानी जाती है।
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