
Ganesh Idol Immersion Rules: गणेश उत्सव के 10 दिन पूरे होने के बाद अब गणपति बप्पा को विदा करने की घड़ी आ गई है। शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी के पावन मौके पर देशभर में गणेश विसर्जन किया जा रहा है। घर-घर में 'गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ' के जयकारे गूंज रहे हैं। लेकिन विदाई की इस जल्दबाजी और भावुक माहौल में अक्सर लोग एक बड़ी चूक कर बैठते हैं। पूजा स्थल पर रखी हर चीज को बप्पा की मूर्ति के साथ उठाकर पानी में बहा देते हैं। ये न सिर्फ शास्त्रों के खिलाफ माना गया है, बल्कि इससे जल प्रदूषण भी बढ़ता है। अगर आप चाहते हैं कि बप्पा जाते-जाते आपके घर में सुख-समृद्धि छोड़कर जाएं, तो विसर्जन यात्रा शुरू करने से पहले पूजा की इन 5 चीजों को तुरंत अलग कर लें।
स्थापना के दिन कलश के अंदर जो तांबे या चांदी का सिक्का और सुपारी डाली जाती है, उसे कभी भी विसर्जन के जल में नहीं फेंकना चाहिए। विसर्जन से ठीक पहले कलश से सिक्का और सुपारी निकाल लें। इसे गंगाजल से धोकर एक लाल कपड़े में लपेटें और अपनी तिजोरी या पैसे रखने की जगह पर रख दें। शास्त्रों के अनुसार, ये बप्पा का साक्षात आशीर्वाद है, जो सालभर घर में पैसों की तंगी नहीं होने देता है।
जिस पाटे या चौकी पर आपने 10 दिनों तक गणेश जी को विराजमान किया था, उस पर बिछा नया सूती या रेशमी कपड़ा पानी में बहाने के लिए नहीं होता है। सिंथेटिक या रंगे हुए कपड़े नदियों को गंदा करते हैं और पानी में रहने वाले जीवों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए मूर्ति उठाने से पहले कपड़े को झाड़कर समेट लें। इस पवित्र कपड़े का इस्तेमाल आप दिवाली पूजन में चौकी बिछाने या घर की तिजोरी में आधार के रूप में कर सकते हैं।
बाजार में मिलने वाले ज्यादातर फैंसी मुकुट, मोतियों की माला और जरी वाले वस्त्र प्लास्टिक या थर्माकोल से बने होते हैं। पानी में जाने के बाद ये कभी नहीं गलते और विसर्जन के अगले दिन किनारों पर कचरे की तरह तैरते हैं, जो देखने में भी गंदा लगता है। ऐसे में बप्पा को जल में उतारने से पहले धातु, प्लास्टिक या कांच का सारा कृत्रिम सामान आदरपूर्वक उतारकर अलग रख लें। पानी में सिर्फ मिट्टी की मूर्ति और प्राकृतिक दूर्वा या ताजे फूल ही जाने दें। उतारे गए सामान को अगले साल दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है।
10 दिनों की पूजा में चढ़ाए गए सूखे फूल, पान के पत्ते और दूर्वा को पॉलीथिन में भरकर पानी में फेंकना भारी गलती मानी जाती है। विसर्जन से पहले इन सभी सूखे फूलों और पत्तियों को एक अलग गमले में इकट्ठा कर लें। ऊपर से थोड़ी मिट्टी डालकर छोड़ दें। 15-20 दिनों में ये बेहतरीन जैविक खाद बन जाएगी, जिसे आप घर के पेड़-पौधों में डाल सकते हैं। बप्पा के चरणों का प्रसाद आपके घर के पौधों को हरा-भरा रखेगा।
अक्सर लोग कलश के पानी को भी मूर्ति के साथ ही विसर्जन स्थल पर ले जाते हैं, जबकि ये सबसे ताकतवर सकारात्मक ऊर्जा से भरा हुआ माना जाता है। विसर्जन पर निकलने से पहले आम के पत्ते या दूर्वा की मदद से इस जल को घर के हर कमरे, मुख्य द्वार और कोनों (शौचालय को छोड़कर) में छिड़कें। बचे हुए जल को घर में लगे तुलसी, शमी या मनी प्लांट की जड़ में अर्पित कर दें। मान्यता है कि इससे घर की सारी नकारात्मक ऊर्जा और नजर दोष तुरंत खत्म हो जाते हैं।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी और धार्मिक बातें अलग-अलग मान्यताओं और सामान्य जानकारी पर आधारित हैं। इन्हें किसी एक संप्रदाय या हर परिवार के लिए अनिवार्य नियम न माना जाए। विसर्जन से जुड़े स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन जरूर करें। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विद्वान या विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
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