
पितृ पक्ष की शुरुआत 26 सितंबर (भाद्रपद पूर्णिमा श्राद्ध) से हो रही है। पितृपक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का समय माना जाता है। परिवार के सदस्य श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसी परंपराएं निभाते हैं। इस दौरान घर की सफाई का भी विशेष ध्यान रखा जाता है। साफ-सुथरा और व्यवस्थित घर न सिर्फ घर की निगेटिव एनर्जी दूर करता है बल्कि पॉजिटिव वाइब्स भी लाता है। जानिए पितृ पक्ष में घर के किन कोनों की सफाई बेहद जरूरी है।
पितृपक्ष में पूजा स्थल की साफ-सफाई जरूर करें। मंदिर में रखी मूर्तियों, दीपक, पूजा की थाली और अन्य सामग्री को व्यवस्थित करें। पूजा स्थान को स्वच्छ रखना धार्मिक रूप से शुभ माना जाता है।
घर का मुख्य दरवाजा सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों में से एक माना जाता है। इस जगह पर धूल-मिट्टी और अनावश्यक सामान जमा न होने दें। धार्मिक मान्यता के अनुसार साफ प्रवेश द्वार घर में सकारात्मकता के लिए अच्छा माना जाता है।
श्राद्ध के दौरान भोजन और प्रसाद तैयार किया जाता है, इसलिए रसोई की स्वच्छता महत्वपूर्ण मानी जाती है। गैस, सिंक, प्लेटफॉर्म और बर्तनों की अच्छी तरह सफाई करें। खराब या लंबे समय से इस्तेमाल न होने वाली चीजों को अलग कर दें।
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वास्तु और धार्मिक मान्यताओं में घर के उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण को विशेष महत्व दिया जाता है। इस हिस्से में कचरा, टूटे सामान या अनावश्यक चीजें जमा न होने दें। हालांकि अलग-अलग परंपराओं में इसके महत्व को लेकर मान्यताएं अलग हो सकती हैं।
अगर घर में पूर्वजों की तस्वीरें रखी हैं, तो उनके आसपास की जगह को साफ और व्यवस्थित रखें। तस्वीरों पर जमा धूल को सावधानी से साफ करें और आसपास अनावश्यक सामान न रखें। पितृपक्ष में पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद करने की परंपरा है, इसलिए इस स्थान को सम्मानपूर्वक रखना उचित माना जाता है।
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