
why ganga is holy river scientific reason: देवनदी गंगा को हिंदू धर्म में सबसे पवित्र नदी माना गया है। इसलिए हर शुभ काम जैसे पूजा-पाठ आदि में भी गंगा जल का उपयोग विशेष रूप से किया जाता है। यदि कोई व्यक्ति मरणासन्न अवस्था में हो यानी शीघ्र ही मरने वाला हो तो उसके मुंह में गंगा जल डालने की परंपरा भी हिंदू धर्म में है। इस परंपरा से जुड़ी कईं मान्यताएं हैं जिनके बारे में कम ही लोगों को जानकारी है। आगे जानिए मरते हुए व्यक्ति के मुंह में क्यों डालते हैं गंगा जल…
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प्राचीन कथा के अनुसार, कपिल मुने के क्रोध से राजा सगर के अनेक पुत्र जलकर भस्म हो गए थे। उनकी मुक्ति का एक ही उपाय था गंगा जल। राजा सगर की कईं पीढ़ियों के बाद राजा भागीरथ हुए। वे तपस्या करके देवनदी गंगा को धरती पर लेकर आए। गंगा जल के स्पर्श से ही राजा भागीरथ के पूर्वजों को मोक्ष मिल गया। इसी मान्यता के चलते मरते हुए व्यक्ति को गंगा जल पिलाया जाता है कि उसे भी इस जन्म-मृत्यु के बंधनों से मुक्ति मिले और वह भी मोक्ष को प्राप्त हो।
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हर व्यक्ति अपने जीवन काल में जाने-अनजानें में कईं पाप करता है। ऐसी मान्यता है कि मृत्यु के बाद उसे अपने पापों का दण्ड नरक में भोगना पड़ता है। मरने वाले को नरक में मिलने वाले दण्डों से बचाने के लिए भी उसे गंगा जल पिलाया जाता है जिससे कि उसके सभी पाप नष्ट हो सकें। गरुड़ पुराण आदि में भी इस बात का वर्णन मिलता है कि मरने वाले के मुंह में गंगा जल डाल दिया जाए तो उसके सभी पाप उसी समय नष्ट हो जाते हैं।
ऐसी मान्यता है कि गंगा स्वर्ग से उतरकर धरती पर आई है, इसलिए इसे देवनदी भी कहते हैं। स्वर्ग से आने के कारण ही गंगा के जल को परम पवित्र माना गया है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी गंगाजल को विशेष माना जाता है क्योंकि इसमें प्राकृतिक तत्व और बैक्टीरियोफेज पाए जाते हैं जो पानी को लंबे समय तक खराब होने से बचाते हैं। यही कारण है कि गंगाजल को शुद्ध और पवित्र समझा जाता है।
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