Ganpati Bappa Morya Meaning: गणपति बप्पा मोरया का क्या मतलब है? जानें इस जयघोष का इतिहास और महत्व

Published : Sep 12, 2026, 04:24 PM IST
Ganpati Bappa Morya Meaning

सार

What is the Meaning of Ganpati Bappa Morya: गणेश चतुर्थी 2026 इस बार 14 सितंबर को मनाया जा रहा है। इस पूजा में गणपति बप्पा मोरया का जयघोष किया जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका मतलब क्या है? जानिए इस जयघोष के पीछे अनसुना इतिहास और इसका महत्व।

Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 को मनाया जा रहा है। इस दिन से शुरू गणेशोत्सव पूरे 10 दिनों तक चलेगा। गणेशोत्सव शुरू होते ही गली-मोहल्लों से लेकर बड़े पंडालों तक एक ही आवाज सुनाई देने लगती है- “गणपति बप्पा मोरया!” बप्पा की आरती हो या विसर्जन की विदाई, ढोल-ताशे बज रहे हों या भक्तों की टोली आगे बढ़ रही हो, यह जयघोष गणेश भक्ति की सबसे पहचान वाली आवाज बन चुका है। लेकिन सवाल यह है कि “गणपति बप्पा मोरया” का असल मतलब क्या है? ‘मोरया’ आखिर किसके लिए कहा जाता है? अगर आपको लगता है कि ‘मोरया’ गणपति का ही कोई दूसरा नाम है या इसका संबंध मौर्य वंश से है, तो कहानी कुछ अलग है। इसके पीछे महाराष्ट्र की पुरानी गणेश भक्ति, मोरगांव के मयूरेश्वर गणपति और संत मोरया गोसावी से जुड़ी परंपरा का उल्लेख मिलता है। जानिए पूरी डिटेल।

जानिए ‘गणपति बप्पा मोरया’ का मतलब

‘गणपति’ भगवान गणेश का नाम है। वहीं ‘बप्पा’ प्यार और सम्मान से पिता या अपने प्रिय संरक्षक के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला संबोधन है। इसलिए ‘गणपति बप्पा’ का भाव हुआ, हमारे पूजनीय गणपति, हमारे अपने बाप्पा। गणेश को विघ्नहर्ता और मंगलकारी देवता के रूप में पूजा जाता है। यही वजह है कि किसी शुभ काम की शुरुआत से लेकर गणेशोत्सव और विसर्जन तक उनका नाम श्रद्धा के साथ लिया जाता है। वहीं ‘मोरया’ शब्द संत मोरया गोसावी से जुड़ी है। मोरया गोसावी को गणेश का अनन्य भक्त माना जाता है। उनकी साधना और मोरगांव के मयूरेश्वर से जुड़ी भक्ति-परंपरा ने उनके नाम को गणेश आराधना के साथ जोड़ दिया। समय के साथ “गणपति बप्पा मोरया” एक लोकप्रिय धार्मिक जयघोष बन गया। इसका भाव भगवान गणेश के प्रति श्रद्धा जताने के साथ उनके महान भक्त मोरया गोसावी को भी स्मरण करना माना जाता है।

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मोरगांव और मयूरेश्वर का क्या कनेक्शन है?

पुणे जिले का मोरगांव अष्टविनायक यात्रा का पहला और आखिरी पड़ाव माना जाता है। यहां भगवान गणेश के मयूरेश्वर स्वरूप की पूजा होती है। महाराष्ट्र पर्यटन विभाग के मुताबिक, अष्टविनायक यात्रा की शुरुआत और समापन इसी मंदिर से होता है। ‘मयूरेश्वर’ नाम के पीछे भी एक पौराणिक कथा है। मान्यता है कि गणेश ने मोर को अपना वाहन बनाकर दैत्य सिंधु का वध किया था, इसलिए यहां उन्हें मयूरेश्वर कहा गया। मोरगांव नाम को भी इस इलाके में कभी बड़ी संख्या में मोरों की मौजूदगी से जोड़ा जाता है।

विसर्जन पर क्यों कहते हैं ‘पुढच्या वर्षी लवकर या’?

गणेश विसर्जन के समय जयघोष अक्सर इस तरह पूरा होता है- “गणपति बप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या।” मराठी के इस वाक्य का अर्थ है- “गणपति बप्पा, अगले वर्ष जल्दी आइए।” यहां एक भावनात्मक बात छिपी है। भक्त गणपति को विदा जरूर करते हैं, लेकिन यह विदाई स्थायी नहीं मानी जाती। विसर्जन के बीच यही उम्मीद रहती है कि बप्पा अगले साल फिर घर आएंगे।

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एक जयघोष में भगवान भी, भक्त भी

इसलिए “गणपति बप्पा मोरया” सिर्फ उत्साह में लगाया जाने वाला नारा नहीं है। इसके भीतर भगवान गणेश के प्रति श्रद्धा, ‘बप्पा’ कहकर अपनापन और ‘मोरया’ के जरिए गणेश भक्ति की एक पुरानी परंपरा, नों भाव दिखाई देते हैं।

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Anita Tanvi

अनीता तन्वी। मीडिया जगत में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। मौजूदा समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर एजुकेशन सेगमेंट संभाल रही हैं। इन्होंने जुलाई 2010 में मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा और अपने करियर की शुरुआत प्रभात खबर से की। पहले 6 सालों में, प्रभात खबर, न्यूज विंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ह्यूमन एंगल और फीचर रिपोर्टिंग पर काम किया। इसके बाद, डिजिटल मीडिया की दिशा में कदम बढ़ाया। इन्हें प्रभात खबर.कॉम में एजुकेशन-जॉब/करियर सेक्शन के साथ-साथ, लाइफस्टाइल, हेल्थ और रीलिजन सेक्शन को भी लीड करने का अनुभव है। इसके अलावा, फोकस और हमारा टीवी चैनलों में इंटरव्यू और न्यूज एंकर के तौर पर भी काम किया है।Read More...
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