
Myths related to Shri Ganesha: भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और प्रथम पूजनीय देवता माना जाता है। किसी भी शुभ काम की शुरुआत से पहले गणेशजी की पूजा करने की परंपरा है। गणेश जी की पूजा से जुड़ी अनेक मान्यताएं और परंपराएं प्रचलित हैं। इन्हीं में से एक है गणेशजी की प्रतिमा की पीठ के दर्शन न करना। ऐसा करना अशुभ माना गया है। इसके पीछे कईं मान्यताएं और कथाएं छिपी हुई हैं। जानें क्या इस मान्यता से जुड़े फैक्ट्स…
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गणेशजी की प्रतिमा की पीठ को देखना शुभ नहीं माना जाता है। इसलिए पूजा के दौरान कोशिश करनी चाहिए कि गणेशजी की प्रतिमा के पीछे की तरफ से दर्शन न हों। मान्यता है कि भगवान गणेश की पीठ पर अलक्ष्मी यानी दरिद्रता का वास होता है। इसलिए गणेशजी के पीठ के दर्शन न करने की मान्यता प्रचलित है।
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भगवान गणेश को सुख, समृद्धि, बुद्धि और सौभाग्य का देवता माना गया है। वहीं, उनकी पीठ को लेकर एक अलग धार्मिक मान्यता प्रचलित है। कहा जाता है कि गणेशजी की पीठ पर दरिद्रता का वास होता है। गणेश प्रतिमा की पीठ के दर्शन करने से सुख-समृद्धि में कमी आ सकती है या धन हानि के योग भी बन सकते हैं। अगर अनजाने में गणेशजी की पीठ दिखाई दे जाए तो घबराने की जरूरत नहीं है। भगवान गणेश का स्मरण करके उनसे क्षमा मांग सकते हैं।
अगर गलती से श्रीगणेश प्रतिमा के पीठ के दर्शन हो जाएं तो इसमें घबराने जैसी कोई बात नहीं है। ऐसा किसी के भी साथ हो सकता है। अगर आपके साथ भी जैसा कुछ हो जाए तो उसी समय ऊं गं गणपत्यै नम: मंत्र का जाप करते हुए श्रीगणेश के मुख के दर्शन कर लें। श्रीगणेश को मंगल मूर्ति भी कहते हैं, जिसके अर्थ है कल्याण करने वाला। ऐसा करने से आपके दोष दूर हो सकते हैं।
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